UGC 2026 Regulations: उच्च शिक्षा सुधार का नया युग क्यों?

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Source:ChatGPT प्रस्तावना  UGC 2026 Regulations भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी के अनुरूप मानव अधिकार ढाँचे में ढ़ालने का प्रयास हैं। ये नियम अकादमिक गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता और शिक्षा तक समान पहुँच जैसे मानव अधिकार सिद्धांतों को सीधे संबोधित करते हैं। UGC 2026 Regulations अचानक किसी फाइल में जन्मा सुधार नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट तक पहुँची रोहित बेमुला और पायल तड़वी की माँओं की पीड़ा से उपजा उच्च शिक्षा में किसी भी प्रकार के भेदभाव के निषेध का एक सजीव दस्तावेज है |  इसी समस्या के समाधान के लिए भारतीय उच्च शिक्षा में समानता का नया युग स्थापित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थाओं में समता का संवर्धन )नियम, 2026 को  13 जनवरी 2026 से लागू किया गया था |  यह लेख मानव अधिकार सन्दर्भ में एक तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है |  यह भी पढ़ें  : मानव अधिकारों के परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान 2026: भारत की चुनौतियाँ   UGC क्या है और नियम किस अधिनियम के तहत बनाये गए हैं ?  विश्व विद्यालय ...

TB-मुक्त भारत 2025: स्वास्थ्य मिशन या मानवाधिकार परीक्षा?

TB-मुक्त भारत 2025 अभियान को दर्शाती रंगीन इन्फोग्राफिक, जिसमें गरिमा, समानता और मानवाधिकार आधारित तपेदिक इलाज का संदेश दिया गया है।
Cradit:Chat GPT

प्रस्तावना 

आज भी देश भर में लाखों लोग TB अर्थात तपैदिक की बीमारी से जूझ रहे हैं | लेकिन क्या उन्हें सिर्फ  जांच और दवाओं की सुविधा मिल रही है, या उनकी  गरिमा, समानता और मानव अधिकारों का भी सम्मान हो रहा है | 

भारत द्वारा 2025 TB -मुक्त भारत बनाने का लक्ष तय किया है, यह लक्ष्य वैश्विक लक्ष्य 2030 की तुलना में 5 वर्ष पहले रखा गया है | यह अत्यधिक महत्वाकांछी पर सराहनीय लक्ष्य है | 

इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण प्रश्न है कि यह मात्र एक स्वास्थ्य मिशन है या फिर मानवाधिकारों की भी कठोर परिक्षा है?   

TB आज भी भारत में गरीबों, श्रमिकों, महिलाओं, कैदियों और हाशिए पर स्थित समुदायों को ज्यादा प्रभावित करती है |

TB केवल एक संक्रामक रोग नहीं है, बल्कि यह गरीबी, अशिक्षा ,भेदभाव, कुपोषण, सामाजिक  बहिष्करण और  प्रशासनिक असंवेदनशीलता से सीधा ताल्लुक रखती है |

इसलिए भारत में TB उन्मूलन का मुद्दा सिर्फ इलाज का नहीं है, बल्कि हाशिए पर स्थित तपेदिक प्रभावित लोगों की गरिमा, समानता और मानव अधिकारों का भी है | 

इस लेख में समझने का प्रयास करेंगे कि कैसे TB का इलाज, नीतियां और मानव अधिकार का संतुलन TB -मुक्त भारत की राह को हकीकत में बदल रहा है |  

TB क्या है?

TB एक हवा के माध्यम से फैलने वाला संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस नामक बेक्टीरिया के कारण होता है। यह अधिकतर फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।

TB कैसे फैलती है?

फेफड़ों की TB से ग्रस्त व्यक्ति जब खांसता, छींकता या थूकता  है तो टीबी का संक्रमण हवा के माध्यम से अन्य व्यक्तयों में फैलता है | परेशानी की बात यह है कि कुछ ही बैक्टीरिया सांस के साथ अंदर जाने से भी संक्रमण हो सकता है। आजकल TB का इलाज संभव है और इससे बचाव भी किया जा सकता है।

TB के प्रकार

फुफ्फुसीय या फेफड़े की TB

यह TB फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह सबसे आम प्रकार का संक्रामक है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर हवा में मौजूद बूंदों के माध्यम से फैलता है।

फेफड़ों के  अलावा शरीर के अन्य भाग की TB

यह फेफड़ों के बाहर होती है और लिम्फ नोड्स, हड्डियों, मस्तिष्क, गुर्दे या फुफ्फुस जैसे किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। यह फेफड़े की TB के मुकाबले कम संक्रामक होता है और आमतौर पर फेफड़ों से शरीर के भीतर फैलता है।

WHO अनुमोदित TB के इलाज का फायदा 

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि उपचार के बिना, TB रोग से मृत्यु दर लगभग 50% है, जो काफी ऊँची है । डब्ल्यूएचओ द्वारा वर्तमान में अनुमोदित दवाओं, जिसमे 4-6 महीने के लिए टीबी-रोधी दवाओं का एक कोर्स रहता है, से टीबी से पीड़ित लगभग 90% लोगों को ठीक किया जा सकता है।

TB का वैश्विक बोझ 

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी ग्लोबल ट्यूबरक्लोसिस रिपोर्ट 2025 के अनुसार विश्व स्तर पर 2024 में, अनुमानित 10.7 मिलियन लोग TB से बीमार हुए और 1.23 मिलियन लोगों की इस बीमारी से मृत्यु हो गई | जबकि इस बीमारी की रोकथाम और इलाज संभव है | 

ग्लोबल ट्यूबरक्लोसिस रिपोर्ट 2025 के अनुसार 2024 में, वैश्विक TB मामलों में से दो-तिहाई मामले आठ देशों में दर्ज किए गए | ये देश हैं भारत, इंडोनेशिया, फिलीपींस, चीन, पाकिस्तान, नाइजीरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और बांग्लादेश | 

वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार 2024 में, TB से पीड़ित लोगों में से 54% पुरुष थे, 35% महिलाएं थीं और 11% बच्चे थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने TB की घटनाओं की दर के सम्बन्ध में देश विशेष में मुख्य कारणों के रूप में प्रति व्यक्ति आय और कुपोषण, एचआईवी संक्रमण, मधुमेह, धूम्रपान और शराब के सेवन संबंधी विकारों की व्यापकता शामिल है।

TB का भारत पर बोझ

WHO की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक TB मामलों में से 25% भारत में दर्ज किए गए  हैं| भारत में किये जा रहे अथक प्रयासों के बाबजूद TB भारत के लिए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है | वैश्विक TB का सर्वाधिक बोझ भारत झेल रहा है |

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विश्व क्षय दिवस 2025 को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2022 में 2.82 मिलियन नए TB के केस पंजीकृत किये गए | जो कि 1,00,000 की आबादी पर 199 केस तक हैं | 

अनुमानित मृत्यु 331000 रही है जो की करीब 33 मृत्यु प्रति 100000 की आबादी पर रही है | छुपे हुए TB के रोगी और ड्रग-रेसिस्टेंट TB आज भी भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है | 

महिलाओं और बच्चों पर टीबी का प्रभाव

TB महिलाओं और बच्चो के लिए सिर्फ स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और पारिवारिक परिणाम भी होते है जो इन्हे झेलने पड़ते हैं | महिलाओं को विशेषकर TB के कारण विवाह में बाधा, विवाह टूटने की समस्या, घरेलु हिंसा, TB के कारण महिलाओं के बच्चे न पैदा होने की समस्या आदि समस्यायों से जूझना पड़ता है | 

इसके अलावा बच्चों को TB होने से उन्हें शिक्षा से वंचित होना पड़ता है | कुपोषण की स्थति में बीमारी उग्र होने से मृत्यु का भी सामना करना पड़ता है | 

TB समाप्ति के लिए वैश्विक रणनीति और प्रयास 

वैश्विक स्तर पर वर्ष 2014 से पहले TB नियंत्रण के प्रयास किये जा रहे से न कि TB समाप्ति के, लेकिन 2014 और 2015 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों द्वारा WHO की TB समाप्ति रणनीति और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (1, 2, 11) को अपनाकर टीबी महामारी को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी। जो अभी तक निरंतर जारी है |  

राष्ट्रीय TB उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP)

भारत सरकार पहले TB नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय TB नियंत्रण कार्यक्रम चलाती थी | जिसे TB उन्मूलन  के रूप में बदला गया | आजकल इसका नाम राष्ट्रीय TB उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) हो गया है | 

इस कार्यक्रम के तहत सरकार रोगियों को निम्न लिखित स्वास्थ्य सुविद्याएँ उपलब्ध कराती है | TB की संका वाले लोगो के लिए निःशुल्क जांच की सुविधा मिलती है और अगर बीमारी पता चलती है तो तुरंत निःशुल्क दवाओं की व्यवस्था मिलती है |

इसके साथ -साथ हर रोगी को 500 रूपये प्रति माह आर्थिक सहायता भी मिलती है | 

TB मानव अधिकार का विषय क्यों ? 

TB मात्र एक संक्रामक बीमारी नहीं है, बल्कि इस बीमारी के संक्रामक होने के कारण समाज में रोगियों को भेदभाव, असमानता,गोपनीयता भंग होना और कलंक जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है | 

गरीबी मानव अधिकारों का सबसे अधिक संक्रमण करती है | विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी पाया है कि यह बीमारी गरीबों तथा हासिये पर स्थित लोगो के प्रति अधिक संवेदनशील है | 

मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा,1948  के तहत अनुच्छेद 25 में स्वास्थ्य के अधिकार का वर्णन किया हुया है | इस अधिकार के तहत न सिर्फ रोग की जांच और इलाज शामिल है, बल्कि गैर -भेदभाव, सम्मान, ईलाज तक आसान पहुंच और सामाजिक सुरक्षा को भी शामिल किया गया है | 

इन सभी की पूर्ती की स्थति में ही स्वास्थ्य के अधिकार के उच्च मानदंड को पाया जा सकता है | स्वास्थ्य के मानव अधिकार के तहत किसी भी TB रोगी के साथ भेद भाव नहीं किया जा सकता है | 

स्वास्थ्य के मानव अधिकार के तहत सरकार TB रोगियों को न सिर्फ जांच और इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दायित्वाधीन है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के मानव अधिकार के संरक्षण, संवर्धन और पूर्ती करने के लिए भी दायित्वाधीन है | 

भारत संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य देश है | सयुंक्त राष्ट्र संघ का भी लक्ष्य वर्ष 2030 तक विश्वभर से TB का उन्मूलन सुनिश्चित करना है | 

भारत के सयुंक्त राष्ट्र संघ के सदस्य के नाते भी उसकी अंतराष्ट्रीय प्रतिबद्धता है कि वह अपने यहाँ TB की बीमारी का उन्मूलन करे | 

निष्कर्ष 

भारत सरकार ने TB -मुक्त भारत की संकल्पना को सिद्धि में बदलने का प्रण लिया था | इसके लिए समय सीमा के रूप में वर्ष 2025 निर्धारित किया गया था, जो कि वैश्विक संस्थाओं द्वारा निर्धारित वर्ष 2030 से 5 वर्ष पहले है | 

भारत के लिए TB -मुक्त भारत एक सार्वजानिक स्वास्थ्य परियोजना का नाम नहीं है, बल्कि यह एक लोकतान्त्रिक और मानव अधिकार की कसौटी है | 

यह सही है कि TB का इलाज दवाओं से ही संभव है, लेकिन रोगियों की गरिमा, समानता और मानव अधिकारों की पूर्ती के बिना सब व्यर्थ है | 

TB -मुक्त भारत की संकल्पना सिर्फ रोगियों की जांच और इलाज तक सीमित नहीं रही है, बल्कि मानव अधिकारों के उच्च मानकों पर आधारित रही है जिसमे उनकी गरिमा, सम्मान और सामाजिक न्याय को सर्वोपरि रखा गया है | 

भारत में बिना किसी भेदभाव के TB के उपचार तक गरीब, महिला, आदिवासी, प्रवासी, मजदूर तथा हासिये पर स्थित लोगों की आसान पहुंच को सुनिश्चित करने का भरपूर प्रयास किया गया है | 

अब समय आ गया है, जब TB को एक बीमारी के रूप में नहीं देखा जाए, बल्कि एक मानव अधिकार चुनौती के रूप में देखा जाए | 

नीति निर्माताओं, न्यायपालिका, विधिवेत्ताओं, स्वास्थ्य व्यवस्था आदि की साझा जिमेदारी है कि लक्ष्य तिथियों को आगे बढ़ाकर मानवीय गरिमा, सम्मान और सामाजिक न्याय को नीतियों के केंद्र में रखा जाए | 

हकीकत में TB -मुक्त भारत  सिर्फ आकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वास्थ्य मिशन के साथ -साथ मानवाधिकारों की भी परीक्षा है |   

TB-मुक्त भारत 2025–अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1. TB-मुक्त भारत 2025 मिशन क्या है?

उत्तर: TB-मुक्त भारत 2025 भारत सरकार का लक्ष्य है, जिसके तहत 2025 तक देश से TB (Tuberculosis) का उन्मूलन करना है। यह लक्ष्य WHO की 2030 समयसीमा से पहले रखा गया है।

प्रश्न 2. क्या TB केवल स्वास्थ्य समस्या है या मानवाधिकार का मुद्दा भी?

उत्तर: TB केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि मानवाधिकार का मुद्दा है। भेदभाव-मुक्त इलाज, गोपनीयता, पोषण सहायता और गरिमा के साथ उपचार जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हिस्सा हैं तथा मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा,1948 के के अनुच्छेद 25 में भी दिया गया है।

प्रश्न 3. भारत में TB का सबसे ज्यादा प्रभाव किन समुदायों पर पड़ता है?

उत्तर: TB का प्रभाव सबसे अधिक गरीब, आदिवासी, प्रवासी मजदूर, कैदी, शहरी झुग्गी-निवासी और कुपोषित बच्चों पर पड़ता है, जहाँ इलाज तक पहुँच और सामाजिक सुरक्षा सीमित होती है।

Q4. क्या भारत में TB का इलाज पूरी तरह मुफ्त है?

उत्तर: सरकारी योजनाओं के तहत TB की जाँच और दवाएँ मुफ्त हैं, लेकिन पोषण, यात्रा खर्च, मजदूरी नुकसान जैसी जरूरतों पर रोगी को ही खर्च करना पड़ता है | 

प्रश्न 5 . MDR-TB और XDR-TB क्या हैं और ये क्यों खतरनाक हैं?

उत्तर: MDR-TB और XDR-TB दवा-प्रतिरोधी TB के प्रकार हैं, तथा मरीज द्वारा इलाज बीच मी छोड़ देने के परिणाम स्वरुप मरीज की सामान्य TB  आसानी से ठीक न होने वाली MDR-TB और XDR-TB का रूप धारण कर लेती है | जिनका इलाज लंबा, महँगा और कठिन होता है। 

✍️ लेखक: Dr Raj Kumar

Human Rights Researcher | Legal Analyst

(न्याय, कानून और मानवाधिकार पर आधारित लेखन)

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धन्यवाद |





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