UGC 2026 Regulations: उच्च शिक्षा सुधार का नया युग क्यों?
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| Source:Image by Annabel_P from Pixabay |
फुटबाल के सुपरस्टार माने जाने वाले लियोनेल मेसी की प्रतिमा अभी हाल ही में कोलकाता मे लगाईं गई है |इस 70 फुट ऊंची प्रतिमा का उदघाटन मेसी द्वारा किया गया | सोशल मीडिया में आई एक खबर के बाद इस प्रतिमा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है |
यह विवाद प्रतिमा निर्माण में सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और विकास की प्राथमिकताओं को लेकर छिड़ गया है | इस सम्बन्ध में सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध में तीखी प्रतिक्रियों की बाढ़ सी आ गयी है | फीफा, फुटबाल और मानवअधिकार के मध्य गहरा सम्बन्ध है |
इसका विरोध करने वालों का मानना है कि कलकत्ता में मेसी की प्रतिमा स्थापना में सार्वजानिक संसाधनों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए | विरोध करने वालों ने नीतिगत जबाबदेही की मांग उठा दी है |
विकास का अधिकार मानव की मूलभूत आवश्यकतों से जुड़ा हुया है, जैसे कि स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छ वातावरण, आवास तथा भोजन आदि |
यदि शहर के स्कूलों में बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं की कमी है, स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का अभाव है, शहरी गरीबों पर आवास की कमी है या स्वच्छ पानी और वातावरण का अभाव है, तो आमजान सार्वजनिक संसाधनों को मूर्तियों पर खर्च लिए जाने पर सवाल उठाये बिना नहीं मानेगे |
सार्वजानिक संसाधनों के उपयोग की प्राथमिकता के आधार पर प्रश्न उठना लाजमी है |मानव अधिकार सिद्धांत भी कहते है कि सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में इक्विटी का अनुसरण किया जाना चाहिए अर्थात समाज के उस तबके पर खर्च के सम्बन्ध में प्राथमिकता दी जानी चाहिए जिसे इसकी ज्यादा जरूरत है |
लोकतंत्र में सवाल करना या असहमति व्यक्त करना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है | समय बदल गया है और अपनी बात रखने के लिए सरकारों का शारीरिक रूप से उपस्थित रहकर घेराव करना पुरानी बाते हो चुकी है |
वर्तमान समय में डिजिटल तकनीकी बहुत आगे बढ़ चुकी है ऐसी स्थति में लोग अपना विरोध डिजिटल रूम में सोशल मीडिया या अन्य आधुनिक साधनो से कर सकते है |
उन्हें शारीरिक रूप से एक स्थान पर विरोध करने के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है | आलोचना किसी भी मजबूत लोकतंत्र की आत्मा है उसकी ताकत है कोई कमजोरी नहीं है |
कोलकाता की पहचान खेल से भी जानी जाती है | वहां खेलों के प्रति आस्था धार्मिक आस्था के समानं है | खेल टकराव का विषय नहीं है बस बात इतनी सी है कि सार्वजानिक संसाधन आम लोगों के विकास के लिए होते हैं |
यदि उनका उपयोग नागरिक सुविधाओं से परे किसी अन्य कार्य के लिए किया जाता है तो यह निश्चित रूप से आमजन को टकराव के लिए उकसाएगा | आवश्यकता संतुलन स्थापित करने की है खेल भी बना रहे और आमजन का विकास का अधिकार का भी उलंघन न हो |
खेल संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए कॉर्पोरेट सोशल फण्ड का उपयोग किया जा सकता है तथा सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग लोगो के बुनियादी अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए किया जा सकता है |
सार्वजनिक धन के उपयोग से पूर्व इस बात का आकलन किया जाना चाहिए कि उसके उपयोग से क्या सामाजिक प्रभाव पढ़ने वाला है |
कोलकात्ता में विश्व प्रसिद्ध फ़ुटबाल खिलाड़ी खिलाड़ी की प्रतिमा के खिलाफ बहुत ही कम लोग होंगे लेकिन अधिकाँश लोगो की आवाजें प्रतिमा स्थापना में उपयोग किये गए सार्वजानिक संसाधनों के विरुद्ध हैं |
खेल से जुडी आस्था का निश्चित रूप से सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन जनता की गाड़ी कमाई के रूप में सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग उनके मानव अधिकारों को संवर्धित करने के लिए किया जाना उचित है न कि उनके मानव अधिकारों में कटौती के लिए |
एक मजबूत और सशक्त लोकतंत्र के लिए खेल की उन्नति भी आवश्यक है और आम लोगो के मानव अधिकारों की सुरक्षा भी आवश्यक है |
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