TB-मुक्त भारत 2025: स्वास्थ्य मिशन या मानवाधिकार परीक्षा?
Cradit:Chat GPT प्रस्तावना आज भी देश भर में लाखों लोग TB अर्थात तपैदिक की बीमारी से जूझ रहे हैं | लेकिन क्या उन्हें सिर्फ जांच और दवाओं की सुविधा मिल रही है, या उनकी गरिमा, समानता और मानव अधिकारों का भी सम्मान हो रहा है | भारत द्वारा 2025 TB -मुक्त भारत बनाने का लक्ष तय किया है, यह लक्ष्य वैश्विक लक्ष्य 2030 की तुलना में 5 वर्ष पहले रखा गया है | यह अत्यधिक महत्वाकांछी पर सराहनीय लक्ष्य है | इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण प्रश्न है कि यह मात्र एक स्वास्थ्य मिशन है या फिर मानवाधिकारों की भी कठोर परिक्षा है? TB आज भी भारत में गरीबों, श्रमिकों, महिलाओं, कैदियों और हाशिए पर स्थित समुदायों को ज्यादा प्रभावित करती है | TB केवल एक संक्रामक रोग नहीं है, बल्कि यह गरीबी, अशिक्षा ,भेदभाव, कुपोषण, सामाजिक बहिष्करण और प्रशासनिक असंवेदनशीलता से सीधा ताल्लुक रखती है | इसलिए भारत में TB उन्मूलन का मुद्दा सिर्फ इलाज का नहीं है, बल्कि हाशिए पर स्थित तपेदिक प्रभावित लोगों की गरिमा, समानता और मानव अधिकारों का भी ...