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| Source:Chat GPT |
विश्वभर में ही नहीं बल्कि भारत में भी महिला होना मृत्यु का कारण बन रहा है। दुनिया के कई हिस्सों में पितृसत्तात्मक समाज आज भी मौजूद हैं।
पितृसत्तात्मक समाज में लैंगिक बराबरी को कोई महत्व नहीं दिया जाता।
संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा 25 नवंबर 2024 को जारी एक रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा का सबसे चरम रूप फेमिसाइड है, जिसका वैश्विक स्तर पर व्यापक विस्तार है।
UNO की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में हर दिन 140 महिलाएँ और लड़कियाँ अपने साथी या किसी करीबी रिश्तेदार के हाथों मरती हैं।
महिलाओं के प्रति यह घृणा, जिसे फेमिसाइड कहा जाता है, कई रूपों में दिखाई देती है। भारत में यह दहेज हत्या, घरेलू हिंसा, सम्मान हत्या, यौन हिंसक हत्या और महिला भ्रूण हत्या के रूप में प्रकट होती है।
यद्धपि कानून में इन्हें अलग -अलग शब्दों के साथ आवश्यकता के अनुसार परिभाषित किया गया है |
फेमिसाइड (Femicide) का समाजशास्त्रीय दृस्टि से तात्पर्य है कि किसी महिला या लड़की की ह्त्या सिर्फ और सिर्फ इसी कारण से कर देना कि वह महिला है | यह अपराध लैंगिक घृणा का भीभत्स स्वरूप है |
लैंगिक कारणों से महिलाओं और लड़कियों को मार दिए जाने की घटनाओं को सयुक्तराष्ट्र फेमिसाइड के रूप में परिभाषित करता है |
विश्वभर में तमाम वैज्ञानिक और सामाजिक तरक्की के बाबजूद आज भी महिलाओं के विरुद्ध लैंगिक आधार पर किया जाने वाला यह अपराध समाज में अस्तित्व में बना हुया है |
यद्धपि भारत में महिलाओं के विरुद्ध लैंगिक आधार पर होने वाले अपराधों को फेमीसाइड शब्द के दायरे में नहीं रखा गया है | भारत में इस अपराध को अलग -अलग शब्दों से सम्बोधित किया जाता है तथा अलग -अलग श्रेणियों में बाटा गया है |
भारतीर आपराधिक कानूनों में फेमिसाइड नाम से कोई अपराध दर्ज नहीं है | हां, फेमिसाइड के रूप लैंगिक आधार पर महिलाओं की हत्यायों को अलग -अलग कानूनों के मुताबिक़ मर्डर, दहेज मृत्यु, कन्या भ्रूण ह्त्या, रेप हत्या आदि में बाँट दिया गया है |
भारत में हत्यायों का यह विभाजन फेमिसाइड की गंभीरता को छुपा देता है | यदि महिलाओं की विभिन्न कानूनों के मुताबिक़ हत्याओं को जोड़ दिया जाए तो, जो आँकड़ा तैयार होगा वह फेमिसाइड की श्रेणी में गिना जाएगा |
यदि महिला ह्त्या के सभी आकड़ो को समग्र रूप में देखा जाएगा तो आँकड़े में स्वाभाविक रूप से बृद्धि दर्ज की जाएगी | ऐसी स्थति में महिलाओं के विरुद्ध लैंगिक आधार पर अपराधों के आकड़ो के अनुसार नीति निर्माण में सही तथ्य और पारदर्शिता आएगी |
महिलाओं के विरुद्ध फेमीसाइड की रूप में आकड़े उपलब्ध होने से सही नीतिनिर्माण में योगदान मिलेगा | जिससे भारत में फेमीसाइड से लड़ने के लिए सही रणनीतिक पहल संभव हो सकेगी |
👉1. लगातार घरेलू मारपीट कर महिलाओं के साथ विभिन्न रूपों में हिंसा और क्रूरता करना ;
👉2. महिलाओं को जला कर / जहर देकर मारना;
👉3. पारिवार के नाम पर महिलाओं पर नियंत्रण;
👉4. महिलाओं को मोबाइल चलाने से रोकना या उन्हें खर्चे के लिए पैसे उपलब्ध न कराना ;
👉5. महिलाओं को लैंगिक आधार पर धमकियां देना ;
👉6. महिलाओं पर हमला करने का इतिहास रहा है;
👉7. महिलाओं का बलात्कार तथा ह्त्या करना ;
👉8. परिवार की इज्जत का दबाव बना कर महिला को उसकी स्वतन्त्रता से वंचित करना ;
👉9. महिला की अचानक गुमशुदगी और उसके बाद उसका जीवित न मिलना ;
👉10. शादी के बाद ससुराल में मानसिक/शारीरिक अत्याचार का किया जाना |
भारत में महिलाओं के विरुद्ध ह्त्या जैसे जघन्य अपराधों के फेमिसाइड शब्द का उपयोग नहीं होता है | यद्धपि इसमें कोई शंका नहीं है कि इसके कई रूपों में भारत में महिलाओं के विरुद्ध हिंसा होती है | भारत में फेमिसाइड के सबसे आम रूप है :
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की नवीनतम रिपोर्ट 'भारत में अपराध 2023" के अनुसार, देश भर में दहेज प्रतिषेद अधिनियम के तहत दहेज से संबंधित 15,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए और वर्ष भर में 6,100 से अधिक दहेज मौतें हुईं।
इस प्रकार दहेज़ हत्याएं भी भारत में फेमिसाइड का ही एक रूप है |
अभी हाल ही में महाराष्ट्रा के नादेड में युवती के दोस्त को युवती के घर वालों ने मार डाला | वे आपस में विवाह का प्लान बना रहे थे |
प्रेमी के दलित होने के कारण प्रेमिका के घर वालों ने प्रेमी की ऑनर किलिंग को अंजाम दिया | इस मामले में प्रेमी की ह्त्या के बाद प्रेमिका ने उसके शव के साथ विवाह की रश्में पूरी की |
पुलिस ने ऑनर किलिंग के बाद लड़की के परिवार के 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है | भारत में इस प्रकार की ऑनर किलिंग फेमिसाइड का एक रूप है |
इन रूपों के अतिरिक्त भी भारत में फेमिसाइड के कई अन्य रूप उपलब्ध हैं जैसे कि बलात्कार के बाद ह्त्या ,बालिका भ्रूण ह्त्या, गुमसुदगी और तस्करी के बाद हत्याएं आदि |
अधिकाँश फेमिसाइड के अपराध जघन्य अपराधों की श्रेणी में आते है | इन अपराधों के कारण महिला मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन होता है |
महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन पर घोषणा 1993 के अनुछेद -3 में स्पष्ट किया गया है कि महिलाओं को बिना किसी लैंगिक भेदभाव के सभी मानव अधिकार प्राप्त हैं |
इन मानवाधिकारों में राजनीतिक,आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, नागरिक मानव अधिकारों के अलावा भी अन्य क्षेत्र में उपलब्ध मानव अधिकार आते है |
महिलायों को इन मानव अधिकारों और स्वतंत्रताओं का बिना किसी भेदभाव के सामान रूप से आनंद और संरक्षण का अधिकार प्राप्त है। इन अधिकारों में अन्य अधिकारों के अलावा निम्नांकित शामिल हैं:
👉1. जीवन का अधिकार; फेमिसाइड से मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा ,1948 के अनुछेद -3 का उलंघन होता है | घोषणा का अनुछेद -3 कहता है कि "प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार है।"
👉2. समानता का अधिकार; मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा में भी कहा गया है कि लैंगिक भेदभाव के रूप में किसी के साथ असमानता का व्यवहार नहीं किया जाएगा | किसी महिला के साथ लैंगिक आधार पर असमानता का व्यवहार भी उसके विरुद्ध हिंसा की श्रेणी में आता है |
👉3. व्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार; मानव अधिकार घोषणाओं और प्रसंविदा में भी हर व्यक्ति को अपनी स्वंत्रता और सुरक्षा का मानव अधिकार प्राप्त है |
👉4 . कानून के तहत समान संरक्षण का अधिकार;
👉5. सभी प्रकार के भेदभाव से मुक्त होने का अधिकार;
👉6. शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के उच्चतम मानक प्राप्त करने का अधिकार;
👉7. काम की न्यायसंगत और अनुकूल परिस्थितियों का अधिकार;
👉8. यातना, या अन्य क्रूर, अमानवीय या अपमान जनक व्यवहार या दंड के अधीन न किए जाने का अधिकार।
फेमिसाइड आज के विकसित और सभ्य समाज में भी चरम पर है | पुरुषों द्वारा सिर्फ अपने दम्भ को शांत करने के लिए लेंगिक आधार पर महिलाओं या लड़कियों की इस तरह की हत्याएं आज भी सयुक्त राष्ट्र महिला जैसे वैश्विक संगठन के लिए चिंता का विषय बना हुया है |
यह सिर्फ महिलाओं की ह्त्या का मामला नहीं है ,बल्कि महिला मानवाधिकारों का मामला है | यह हमारे सभ्य समाज के माथे पर कलंक के अलावा न्याय व्यवस्था और मानव अधिकारों पर सीधा हमला है |
जबतक महिलाओं के लिए उनके घर से लेकर सड़क और उनके कार्य स्थल तक मानव अधिकार संरक्षित नहीं हो जाते हैं, तब तक महिला मानव अधिकारों का उनके लिए कोई अस्तित्व नहीं है |
फेमिसाइड सिर्फ़ किसी एक महिला की मौत नहीं—यह हमारे समाज, न्याय व्यवस्था और मानवाधिकार मूल्यों पर सीधा हमला है। जब तक महिलाएँ अपने ही घर, सड़क, कार्यस्थल और संबंधों में सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक मानवाधिकारों की कोई भी परिभाषा अधूरी है।
महिलाओं के विरुद्ध हर प्रकार की हिंसा रोकने की लिए भारत में क़ानून बने हुए है | बस अब जरूरत मात्र उनके गंभीरता से लागू करने और सामाजिक सोच बदलने के लिए हर प्रयास करने की आवश्यकता है |
जब तक महिला स्वयंम को घर से लेकर कार्य स्थल तक सुरक्षित न समझे, तब तक सरकार और समाज द्वारा सच्ची और ईमानदार पहल की आवश्यकता बनी रहेगी |
प्रश्न 1: फेमिसाइड (Femicide) क्या है?
उत्तर : फेमिसाइड वह अपराध है जिसमें किसी महिला या लड़की की हत्या उसके महिला होने के कारण की जाती है | यह जेंडर आधारित ह्त्या का भीभत्स रूप है |
प्रश्न 2: फेमिसाइड और सामान्य हत्या में क्या अंतर है?
उत्तर : सामान्य हत्या किसी भी कारण से हो सकती है, सिवाए लैंगिक आधार को छोड़ कर | जबकि
फेमिसाइड का उद्देश्य महिला होने के आधार पर मृत्यु कारित करना होता है |
प्रश्न 3: भारत में फेमिसाइड के मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
उत्तर : भारत में फेमिसाइड के मुख्य प्रकार दहेज हत्या, ऑनर किलिंग, पार्टनर-हिंसा आधारित हत्या, यौनहिंसा के बाद ह्त्या तथा गर्भ में कन्या भ्रूण ह्त्या आदि हैं |
प्रश्न 4: फेमिसाइड के बारे में सयुंक्त राष्ट्र संघ (UNO) की ताज़ा रिपोर्ट क्या कहती है?
उत्तर : UN Women की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में हर 11 मिनट में एक महिला की हत्या उसके परिवारीजन या पार्टनर द्वारा होती है।
प्रश्न 5: भारत में फेमिसाइड किन कारणों से बढ़ रहा है?
उत्तर : भारत में फेमिसाइड बढ़ने के कई कारण मौजूद हैं | इन कारणों में पितृसत्तातमक व्यवस्था के साथ -साथ लैंगिक भेदभाव की व्यवस्था का होना, दहेज प्रथा, ऑनर-किलिंग, अंतरंग दोस्ती के दौरान हिंसा, लचीला क़ानून और सजा की दर का कम होना, महिलाओं के प्रति समाज में असमानता की मानसिकता आदि कारण शामिल हैं |
प्रश्न 6: क्या भारत में फेमिसाइड के लिए अलग कानून है?
उत्तर : नहीं। भारत में फेमिसाइड नाम से किसी अपराध को परिभाषित नहीं किया गया है |
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