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भारत में ट्रांसजेंडर्स की जीवन यात्रा : पहचान के संकट से मानव अधिकारों तक ! 2026

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Source: Instagram @weareyuvaa भूमिका   भारत विविधताओं से संपन्न देश है बाबजूद इसके भारतीय संस्कृति में वसुधैव कुटुंबकम की प्राचीन अवधारणा का प्रभुत्व आज भी दिखाई देता है | यहाँ हर धर्म, पंथ, मूलवंश, जाति, भाषा, क्षेत्र, संस्कृति  के लोग मिलजुल कर एक साथ रहते हैं |  लेकिन ऐतिहासिक रूप से देखा जाय तो ट्रांसजेंडर समुदाय को इस विविधता से भरे भारतीय समाज में वह पहचान नहीं मिली है जिसके वे हक़दार रहे हैं | सदियों से उन्हें उनकी मूल पहचान और गरिमा से वंचित रखा गया है | ट्रांसजेंडर समुदाय को समाज में हिजड़ा ,किन्नर आदि के नामो से भी जाना जाता है |  उन्हें माननीय कोर्ट के के नालसा निर्णय के बाद तीसरे लिंग के रूप में विधिक मान्यता मिली है | यह समुदाय सदियों से गंभीर भेदभाव, उपेक्षा और अनेक रूपों में हिंसा का सामना करता आया है|  समाज में उनके साथ भेद भाव के चलते स्वास्थ्य, शिक्षा ,रोजगार और गरिमामई जीवन के अधिकार से वंचित रहना पड़ा है | यह सब उनके द्वारा मानव अधिकार की मूल भावना के विरुद्ध झेला गया है | परन्तु भारत में पिछले एक दशक से ट्रांसजेंडर्स की स्थति में बदलाव आये हैं ...

मानवाधिकार शिक्षा का नया अध्याय: बच्चों को सिखाई जाएगी लैंगिक सुरक्षा की समझ

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Source: Chat GPT परिचय भारत में एक वरिष्ठ अधिवक्ता  आबाद हर्षद पोंडा  द्वारा हाल ही में  सुप्रीम कोर्ट में  एक जनहित याचिका दायर की गई है | इस जनहित याचिका ने शिक्षा जगत में एक नई बहस छेड़ दी है | इस याचिका Aabad Harshad Ponda v. Union of India , W.P. (Crl.) No. 382/2024 का उद्देश्य, "भारत में महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा के बारे में जागरूकता पैदा करने तथा इस संबंध में, शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम चलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश प्राप्त करना रहा है |   सुप्रीम कोर्ट ने इस PIL को स्वीकार करते हुए इस पर संज्ञान लिया है | माननीय कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि देशभर में शैक्षणिक संस्थानों में महिला सुरक्षा और यौन अपराधों से संबंधित कौन-कौन से शिक्षण मॉड्यूल पहले से चल रहे हैं। यह भी पढ़ें :   UGC Fake Universities 2026: इन फर्जी यूनिवर्सिटी से बचें, वरना करियर खत्म! मामले का मूल आधार  विगत कुछ वर्षों में देखा गया है कि भारत में यौन अपराधों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं | इसका एक कारण नाबालिगों में कानून की समझ का कम होना है | इस ...

POCSO से मुक्ति? प्रेम के नाम पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला !

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Source:by Waldryano from Pixabay image परिचय                   28 अक्टूबर 2025 को POCSO के एक मामले K .Kirubkaran vs State of Tamilnadu , 2025 INSC 1272  में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया एक दुर्लभ फैसला है, जिसमे पोक्सो के तहत दोषी ठहराए गए आरोपित युवक को दोषमुक्त कर दिया गया | भारत का न्यायिक इतिहास आश्चर्यजनक फैसलों से भरा पड़ा है | यह सर्व विदित है कि स्थानीय न्यायालय क़ानून से बंधे होते हैं लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट साम्या के कोर्ट होते हैं | इन्हे असाधारण शक्तियाँ प्राप्त होती हैं | इनके फैसले विधि व्यवस्था को नई दिशा देते हैं तथा मानवीय पहलुओं को भी समझने का अवसर देते हैं |  यह मामला सिर्फ दोष मुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह क़ानून की सख्ती और करुणा के बीच संतुलन का बेहतरीन उदाहरण है | इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ  POCSO में आरोपित को राहत दी, बल्कि अपराध की पीड़िता को भी न्याय दिया गया है | यह फैसला कानूनी तौर पर संब्रद्ध है तथा भावुक  करने वाला है |  यह...

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