बच्चे, मानव अधिकार और संविधान: भारत अपने भविष्य के साथ क्या कर रहा है?
प्रस्तावना संविधान किसी भी देश के नागरिकों के मानव अधिकारों के संवर्धन एवम संरक्षण और उनका उलंघन रोकने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है तथा जो समाज के सभी वर्गों के अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है | भारतीय संविधान में विशेषकर बच्चों के अधिकारों को विशेष महत्त्व दिया है | जिसके आधार पर उनकी मासूमियत और भविष्य की रक्षा होती है | मानवाधिकार और संवैधानिक प्रावधान दोनों बालकों को सुरक्षित, शसक्त और विकासोन्मुख वातावरण प्रदान करते हैं | यह लेख अद्यतन किया गया है | बच्चे देश का मुस्तकबिल होते हैं तथा देश के विकास और सम्बृद्धि के आधार होते हैं | भारत में एक लिखित संविधान है जो नागरिकों को,जिसमे अपनी मासूमियत के लिए पहचाने जाने वाले बच्चे भी शामिल हैं, के संवैधानिक और विधिक अधिकारों की गारंटी प्रदान करता है | इसी लिए भारतीय संविधान बाल अधिकारों का प्रणेता हैं | बच्चों के अधिकार को मूल अधिकार और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के रूप में संविधान में समाहित किया गया हैं | बच्चे मानवता की दिव्यतम निधि हैं, जो देश के विकास की बुनियाद और गारंटी दोनों है |...