UGC 2026 Regulations: उच्च शिक्षा सुधार का नया युग क्यों?
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| Source:Chat GPT-5 |
बात उन दिनों की है जब ड्रोन खिलोनो के रूप में कभी-कभार दिखाई देते थे | हमारे घर के सामने एक कामर्सिअल पायलट रहते थे | हमारे घर के सामने एक बड़ा पार्क है |
एक दिन पायलट एक ड्रोन लाए और उसे पार्क में उड़ाया | उस समय लोगो में उत्सुकता बहुत थी | पायलट द्वारा उड़ाया गया ड्रॉन बहुत तेज आवाज कर रहा था जो आजकल के ड्रोन्स नहीं करते हैं|
ड्रोन की आवाज सुनकर उत्सुकतावस सभी घर से बाहर आये कि अचानक पार्क में से इतनी आवाज कैसे आ रही है | उस समय लेखक का पुत्र 6 -7 वर्ष का रहा होगा तथा वह भी ड्रोन की आवाज सुनकर बाहर दौड़ा तो पाया कि एक अजीब सी आकृति पार्क के आसमान में उड़ रही है |
उसे देख कर सभी लोग आशचर्य चकित थे | बाद में पार्क में गए तो पायलट महोदय से बात-चीत में पता चला कि वह कुछ और नहीं बल्कि ड्रोन था |
उस ड्रोन को उड़ता देकने के बाद लेखक के पुत्र ने जिद पकड़ ली कि मुझे ड्रोन चाहिए तो चाहिए | लेखक उसकी जिद के सामने वेबस था |
ड्रोन के सम्बन्ध में धुंदली सी याद है कभी -कभी खबरे आती थी कि आगरा स्थित ताज महल के आसपास संदिग्ध ड्रोन मड़राता दिखा | ड्रोन उड़ाने वाले की पुलिस द्वारा तलाश शुरू |
ऐसा नहीं था कि लेखक आर्थिक रूप से अपने बच्चे के लिए ड्रोन खरीदने में सक्षम नहीं था बल्कि लेखक की पृस्ठभूमि कानून से जुडी हुई थी इसलिए लेखक अपने बच्चे को ड्रोन दिलवाकर किसी कानूनी पचड़े में नहीं पड़ना चाहता था |
इसलिए लेखक बच्चे की ड्रोन खरीदने की वह इच्छा आज तक पूरी नहीं कर पाया | इस बात का अवसोस भी है और सकून भी है | यह लेख उसके साथ साथ तमान उन लोगों के लिए है, जो ड्रोन तो उड़ाने की इच्छा रखते हैं लेकिन उन्हें भारतीय ड्रोन कानूनों की जानकारी नहीं है |
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| Image by Gábor Adonyi from Pixabay |
"ड्रोन" से कोई मानव-रहित वायुयान प्रणाली विहित है | भारत में ड्रोन को बजन के अनुसार पाँच केटेगरी में बाँटा गया है| ये पाँच प्रकार Nano, Micro, Small, Medium और Large UAVs हैं और क्रमशः इनका वजन 250g, 250g – 2kg, 2kg – 25kg, 25kg – 150kg, 150kg से ऊपर होता है |
भारत में पिछले कुछ वर्ष ड्रोन या UAV (Unmanned Aerial Vehicles) के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार को समर्पित रहे है |
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| Image by Herney Gómez from Pixabay |
अब ड्रोन सिर्फ फोटोग्राफी तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण कार्यों जैसे कृषि सर्वेक्षण, ट्रैफिक निगरानी, बॉर्डर सुरक्षा निगरानी, आपदा प्रबंधन,बड़-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निरीक्षण आदि में उपयोग हो रहे हैं |
ड्रोन के अत्यधिक व्यापक उपयोग ने सुरक्षा और गोपनीयता (Privacy) सम्बन्धी चिंताएं बढ़ा दीं हैं | जिसके चलते एक सुदृढ़ कानूनी ढांचे की आवश्यकता भी बढ़ी है |
जिसके परिणाम स्वरुप भारत में वर्ष 2021 में ड्रोन रूल्स लाये गए | सरकार का अनुमान है कि भारत में 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बनने की क्षमता है।
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भारत में ड्रोन संचालन के नियम DGCA (Directorate General of Civil Aviation) द्वारा तय किये जाते हैं | यह विभाग नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन आता है |
मंत्रालय ने “Drone Rules 2021” को आगे बढ़ाते हुए कई सुधार किए गए हैं | पुराने नियमों में सुधार करते हुए ड्रोन (संशोधन) नियम 2022 लाये गए |
मंत्रालय ने ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उद्योग का आसान पंजीकरण और पारदर्शी लाइसेंसिंग प्रणाली बनाई है। ड्रोन कानून के संबन्ध में भारत में कुछ नए बदलाव और जिम्मेदारियाँ लाई गई हैं |
डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म पर हर ड्रोन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जिसके सम्बन्ध में ड्रोन मालिक को Unique Identification Number (UIN) मिलता है।
हर व्यक्ति के लिए 250 ग्राम से बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस आवश्यक है, लेकिन मईक्रो-ड्रोन (गैर -वाणिज्यिक उपयोग के लिए) और नैनो-ड्रोन के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होती है |
ड्रोन उड़ाने के लिए किसी भी क्षेत्र को सुरक्षा क्षेत्र और नो-फ़्लाई ज़ोन में बाँटा गया है | ड्रोन ऑपरेट करने के लिए तीन रंगों में ज़ोन तय किए गए हैं: ग्रीन ज़ोन, यह वह जोन है, जहाँ बिना अनुमति ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं |
दुसरा क्षेत्र येलो ज़ोन के रूप में जाना जाता है | इस क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने के लिए पूर्व-स्वीकृति आवश्यक होती है |
तीसरा होता है रेड ज़ोन,जिसमे ड्रोन उड़ाना पूरी तरह निषिद्ध होता है | इस जोन से संवेदनशील स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
2021 के नियमों के अनुसार ग्रीन जोन में में ड्रोन का संचालन करने वाली अनुसंधान एवं विकास संस्थाओं को टाइप सर्टिफिकेट, विशिष्ट पहचान संख्या और रिमोट पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है।
भारत में ड्रोन नियम 2021 के तहत ड्रोन टैक्सियों को शामिल करने की महत्वपूर्ण आकांछा के चलते ड्रोन का कवरेज 300 किलोग्राम से बड़ा कर 500 किलोग्राम कर दिया गया |
अधिकृत ड्रोन ट्रेनिंग स्कूल से ड्रोन उड़ाने की ट्रेनिंग लेने के बाद डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के माध्यम से रिमोट पायलट प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है | जिसके प्राप्त होने के बाद 15 दिन के भीतर डीजीसीए रिमोट पायलट लाइसेंस जारी कर देता है |
डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म पर निर्माता और आयातक स्व-प्रमाणन के माध्यम से अपने ड्रोन की विशिष्ट पहचान संख्या उत्पन्न कर सकते हैं।
ड्रोन नियम 2021 के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए अधिकतम जुर्माना घटाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है ।
वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक लगातार चरणबद्ध तरीके से आवश्यकता अनुसार इसमें सुधार किया गया है |
आज भारत के ड्रोन संबंधित कानून और नीतियाँ वैश्विक स्तर पर एक मॉडल के रूप में स्वीकार किये जा रहे हैं | यद्यपि अभी भी इनमे सुधार की बहुत गुंजाइश है |
भारत की ड्रोन नीति कई देशों से उन्नत किस्म की है | भारत ने ड्रोन के पंजीकरण के लिए डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म बनाया है | ड्रोन को औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस का प्रावधान किया है |
इसके अतिरिक्त लाइसेंस शुल्क कम रखे गए हैं | जिससे स्टार्ट-अप जैसे सरकार के प्राथमिकता वाले औधोगिक क्षेत्र में बृद्धि को दर्ज किया जा सके | इसके साथ -साथ एमएसएमई सेक्टर अर्थात सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम को बढ़ावा मिल सके।
अंतराष्ट्रीय स्तर पर ICAO (International Civil Aviation Organization) ने ड्रोन उड़ान के लिए गाइडलाइन जारी की है।
भारत की ड्रोन उड़ान नीति इन्हीं गाइडलाइन के अनुरूप है | अंतराष्ट्रीय ड्रोन उड़ान नीतियों को अनेक देशो ने अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के हिसाब से अनुकूलित किया है।
दूर दर्ज के क्षेत्रों में ई-कॉमर्स और फ़ूड डिलीवरी में UAV की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। भारत में भी इस तरह की संभावनाओं पर कार्य चल रहा है |सरकार फसल मूल्यांकन, भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, कीटनाशकों के छिड़काव आदि क्षेत्रों में भी ड्रोन को बढ़ावा दे रही है | एक अनुमान के अनुसार भारत में ड्रोन सेवा उद्योग में 30,000 करोड़ रुपए से अधिक की वृद्धि तथा पाँच लाख से अधिक रोज़गार सृजित होने की उम्मीद जताई गई है |
भारत में कृषि में कीटनाशक छिड़काव, फसल विश्लेषण और मिट्टी परीक्षण के लिए बड़े पैमाने पर ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है | यह किसानों के समय और लागत दोनों की बचत में सहायक है |
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| Image by Angelo Giordano from Pixabay |
स्मार्ट सिटीज़ में ट्रैफ़िक मॉनिटरिंग सुचारू सामाजिक नियंत्रण के लिए अति आवश्यक है | जाम से सम्बंधित सटीक जानकारी हासिल करने के लिए ड्रोन की सेवाएं ली जा रही है |
आज-कल आपदा प्रबंधन में ड्रोन अहम भूमिका निभा रहे हैं। देश की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए भी ड्रोन सुविधाओं का भरपूर उपयोग किया जा रहा है |
विश्व प्रसिद्ध और प्राचीन धरोहर ताजमहल के ऊपर कई बार ड्रोन को उड़ते देखा गया |
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| Taj Mahal: Image by Luca from Pixabay |
इन संदेहास्पद उड़ानों ने ताजमहल की सुरक्षा और वहां आने वाले लाखों पर्टकों की सुरक्षा के लिए प्रशासन के समक्ष सुरक्षा सम्बन्धी प्रश्न खड़ा कर दिया |
जिसके बाद सरकार ने ताज महल पर ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए एक एसओपी( स्टैण्डर्ड आपरेशन प्रोसीजर) समिति बनाई |
ताजमहल की परिधि के 500 मीटर की दूरी तक ड्रोन नहीं उड़ाया जा सकता है | अब ताज महल की सुरक्षा में एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात कर दिया गया है|
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ड्रोन के माध्यम से निजी और संवेदनशील डेटा इकट्ठा किया जा सकता है | जिससे प्राइवेसी और डेटा की गोपनीयता भंग होने की सम्भावनाये बनी रहती हैं |
इसलिए भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह एक मजबूत डेटा प्रोटेक्शन कानून बनाए | जिससे लोगों के निजता के अधिकार की रक्षा हो सके |
वैश्विक स्तर पर ड्रोन सम्बंधित तकनीक तेजी से बदल रही है। ऐसी स्थति में भारत में उपलब्ध नियमों में समय -समय पर सुधार की अत्यधिक आवश्यकता बनी रहेगी | जिससे ड्रोन तकनीकी, नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे |
ड्रोन के नियमानुसार और कुशल संचालन के लिए ड्रोन ऑपरेटर्स को प्रमाणित प्रशिक्षण देना और लोगों में जागरूकता फैलाना आवश्यक है | जिससे अनावश्यक दुर्घटनाएँ और ड्रोन के दुरुपयोग को रोका जा सके |
भारत में ड्रोन संचालन के लिए बनाये गए कानून न सिर्फ भारतीय जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि नवोन्वेषण के कारण वे वैश्विक मानक बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है |
डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म जैसे आधुनिक नवोन्वेषक प्लेटफॉर्म तथा भारत की औधोगिक नीति के तहत सिंगल विंडो सिस्टम ड्रोन उत्पादन के क्षेत्र में निवेशों और इन्नोवेटर्स के लिए आकर्षक का केंद्र बिंदु बन रहे हैं |
प्रश्न : क्या भारत में ड्रोन का उपयोग करना कानूनी है?
उत्तर : हाँ, ड्रोन उड़ाना भारत में पूरी तरह कानूनी है, बशर्ते ड्रोन संचालन से जुड़े सभी कानूनों (Drawn Law) का विधिवत पालन किया जाए |
प्रश्न : भारत में ड्रोन उड़ाने के लिए किस प्रकार की अनुमति की ज़रूरत होती है?
उत्तर : 250 ग्राम से बड़े ड्रोन के लिए ड्रोन का रजिस्ट्रेशन, DGCA से रिमोट पायलट लाइसेंस और डिजिटल स्काई पर अनुमति की आवश्यकता होती है |
प्रश्न : भारत के ड्रोन कानून दुनिया के दुसरे देशों से कैसे अलग हैं|
उत्तर : क्योंकि भारत ने डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म और ज़ोन-आधारित रेग्युलेशन बनाये हैं, जो कई देशों से अलग और आगे हैं।
प्रश्न : क्या विदेशी कंपनियाँ भारत में ड्रोन संचालन कर सकती हैं?
उत्तर :नहीं ,विदेशी कंपनियों को भारत में ड्रोन संचालित करने की अनुमति नहीं है | भारत में पंजीकृत ड्रोन कंपनियों में विदेशी स्वामित्व पर कोई प्रतिबंध नहीं है|
ड्रोन शक्ति योजना के प्रस्ताव के बाद मेड- इन- इंडिया ड्रोन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में ड्रोन के आयात पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया | लेकिन उनके पुर्जों के आयात पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है |
प्रश्न : भारत में ड्रोन नियमों का पालन न करने पर क्या सज़ा है?
उत्तर : भारत में ड्रोन नियमो का अनुपालन न करने की दिशा में 1 लाख रूपए जुर्माना अधिरोपित किया जा सकता है | इसके अलावा ड्रोन ज़ब्ती या संचालन पर प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है |
यह लेख केवल शैक्षणिक और जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति,संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
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धन्यवाद |
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Very nice
जवाब देंहटाएंthanks.
जवाब देंहटाएंThis blog beautifully explains India’s evolving drone laws in simple, relatable language — it not only informs but also sparks curiosity about how technology and regulation shape our future
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