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UGC Fake Universities List 2026: भारत के फर्जी विश्वविद्यालयों की पूरी सूची

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Cradit: ChatGPT  Fake Universities UGC list 2026  दिल्ली 1 .आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंस (ए. आई. पी.पी. एच.एस.) स्टेट गवर्नमेंट यूनीवर्सिटी , आफस के एच नं. 608-609, प्रथम तल संन्त कृपाल सिंह पब्लिक ट्रस्ट बिल्डिंग बी.डी.ओ. कायार्लय के पास अलीपुर दिल्ली -36 कमर्सिअल यूनिवर्सिटी लिमिटेड दरियागंज ,दिल्ली 2 .यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी दिल्ली 3 .वोकेशनल यूनिवर्सिटी दिल्ली 4 .ए.डी.आर.- सेंट्रिक जुरिडिकल यूनिवर्सिटी, ए.डी.आर. हाउस, 8जे, गोपाल टॉवर, 25 राजेन्द्र प्लेस, नई दिल्ली – 110008 5 .इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड इंजीनियरिंग ,नई दिल्ली 6  .विश्वकुमार ओप्पन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, इंडिया सेवा सदन, 672, 7  .संजय एंक्लेव, अपोिजट जी.टी .के .डिपो, नई दिल्ली – 110033 8  .आध्याित्मक विश्वविद्यालय (स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी), 351-352, फे स-1, ब्लॉक-ए, विजय बिहार रिठाला ,रोहिणी दिल्ली – 110085 9  .वल्डर् पीस ऑफ़ यूनाइटेड नेशनस यूनिवर्सिटी (डब्लू.पी.यू.एन.यू), नंबर-201, द्वतीय तल,बेस्ट बिजनेश पाकर्, नेताजी सुभाष प्लेस, पीतमपुरा, नई...

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत कैसे दर्ज कराएँ ?

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राष्ट्रीय  मानव अधिकार  आयोग (NHRC) में शिकायत कैसे दर्ज कराए ? Source:Chat GPT सयुंक्त राष्ट्र संघ के अनुसार उसके हर सदस्य देश में मानव अधिकारों का संवर्धन और संरक्षण के लिए राष्टीय स्तर पर एक संस्था होनी चाहिए | इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना की गई है | अन्य कई कार्यों के अलावा यह राष्ट्रीय संस्था सम्पूर्ण देश से  आने वाली मानव अधिकार उल्लंघन से सम्बंधित घटनाओं की शिकायतों  पर सुवाई का भी कार्य करती है | किसी भी व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता और सम्मान के खिलाफ कोई भी कार्य मानवाधिकार उल्लंघन की परिधि में आता है| आप यहाँ मानव अधिकार उलंघन से सम्बंधित किसी भी घटना की शिकायत  ऑनलाइन या ऑफलाइन  आसानी से दर्ज करा सकते हैं |  🌐 1. क्या है ऑनलाइन शिकायत करने का आसान तरीका ?  मानव अधिकार उल्लंघन के सम्बन्ध में ऑनलाइन शिकायत बहुत आसानी और तेजी के साथ NHRC की वेबसाइट पर  दर्ज कराई जा सकती है। NHRC की वेबसाइट पर जाएं:   https://www.nhrc.nic.in/ ‘Complaint’  टैब पर क्लिक करें |...

विश्व व्यावसायिक चिकित्सा दिवस 2025: मानवाधिकार और पुनर्वास का प्रतीक

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Source : Canva परिचय   27 October 2025 -World Occupational Therapy Day Special   हर वर्ष 27 अक्टूबर को विश्व व्यावसायिक चिकित्सा दिवस /ऑक्यूपेशनल थेरेपी दिवस मनाया जाता है |  यह उत्सव सिर्फ किसी पेशे की पहचान नहीं है, बल्कि उन असंख्य लोगों के मानव अधिकारों का सम्मान भी है जो शारीरिक, मानसिक  भावनात्मक चुनौतियों से झूज रहे होते हैं |  वे जीवन में फिर से सार्थक और गरिमामयी जीवन जीने की अभिलाशा रखते हैं |  ऑक्यूपेशनल थेरेपी मानव अधिकार के मूल सिद्धांत, स्वतंत्रत्रा, जीवन में सामान अवसर और जीवन की गरिमा को विवहारिक रूप में साकार करने का प्रयास करती है |    व्यावसायिक चिकित्सा /ऑक्यूपेशनल थेरेपी क्या है ? व्यावसायिक चिकित्सा/ऑक्यूपेशनल थेरेपी एक स्वास्थ्य सम्बन्धी पेशा है जिसकी अपनी अलग पहचान है | जिसका मूल उद्देश्य विभिन्न प्रकार की अक्षमताओं से परेशान लोगों को उनके रोजमर्रा के कार्यों के लिए सक्षम बनाना है | जिससे उनकी दुसरे लोगों पर निर्भरता कम या समाप्त हो सके| उनमे चाहे कोई व्यक्ति  सर्जरी, स्ट्रोक या लकवा, मानसिक तनाव, आटिज्म या बृ...

भारत में ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट को डॉक्टर (Dr.) का दर्जा — एक मानवाधिकार संदर्भ

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Source:Chat GPT प्रस्तावना भारत में स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ डॉक्टर्स पर निर्भर नहीं करती हैं बल्कि वह एक व्यापक प्रणाली का अभिन्न अंग है | इस प्रणाली में डॉक्टर के अलावा नर्सों, फिजियोथेरेपिस्टों, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्टों और अन्य पैरा-मेडिकल पेशेवरों की संयुक्त भूमिका रहती है |  लेकिन हाल के दिनों में “डॉ (Dr.) उपनाम के उपयोग” को लेकर मुद्दा काफी गर्माया हुया है | इस सम्बन्ध में फिजियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट लम्बे समय से सरकार से मांग करते आये हैं | जिसे समय- समय पर विभिन्न कारणों से टाला जाता रहा है | कई बार यह मुद्दा कोर्ट में जा चुका है | राष्ट्रीय संबंद्ध अवं स्वास्थ्य देखभाल व्यवसाय आयोग ( NCAHP ) की ओर से फिजियोथेरेपिस्ट को अपने नाम के आगे "डॉ." और पीछे क्रमशः "PT" तथा "OT" का उपयोग करने की अनुमति दी है |  जो उनकी  पेशेवर पहचान और सामाजिक गरिमा के लिए आवश्यक है |  यह भी पढ़ें  :  Epstein Files के बाद सवाल: क्या भारत मे POCSO पीड़ितों के लिए सिर्फ कानून काफी है? ऑक्यूपेशनल थेरेपी(OT) क्या है?  अनेक व्यक्ति विभिन्न कारणों से शारीरिक, मानसिक या...

स्वास्थ्य मानवाधिकारों की बड़ी जीत : "ORS" केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

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  प्रस्तावना  भारत में जीवन का अधिकार सिर्फ जानवरो की तरह जीवन जीने या सास लेने के अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि सवास्थ्य जीवन जीने का मौलिक अधिकार भी है |  हाल ही में "ORS " विवाद में एक जागरूक डॉक्टर, न्यायपालिका और न्यामक संस्थाओं की सक्रीय भागेदारी ने यह सिद्ध कर दिया कि भ्रामक विज्ञापन और झूठे दावे जनता के साथ गंभीर खिलवाड़ है और भारतीय कानून और न्याय व्यवस्था इसे बर्दास्त नहीं करेंगे |  स्वास्थ्य का अधिकार जीवन के अधिकार का अभिन अंग है | किसी को भी भारत में आम लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार से खिलवाड़ करने की आजादी नहीं दी जा सकती है |  स्वास्थ्य अधिकार एक महत्व पूर्ण मानव अधिकार है | विभिन फोरम से दिए गए फैसलों ने स्वास्थ्य अधिकारों के दायरों को विस्तृत आयाम दिया |  इस लेख में इस केस की पृष्टभूमि, महत्व पूर्ण निर्णय, मानव अधिकार और भविष्य की चुनौतियों को जानने का  प्रयास करेंगे|  पृष्ठ्भूमि : विवाद की शुरुआत , "ORS" तथा WHO   1. ORS  क्या है ? Source:Social Media "ORS" का तात्पर्य है Oral Rehydration Salts /Solutions -यह ...

बाल अधिकारों की बड़ी जीत : सुप्रीम कोर्ट ने 44 साल बाद ह्त्या के दोषी को दी आजादी

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Source:Chat GPT परिच य बाल न्याय से सम्बंधित एक मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा | जिसमे न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह की खंडपीठ द्वारा फैसला सुनाया गया | फैसले से स्पष्ट होता है कि बच्चे हमेशा बच्चे होते हैं| आपराधिक न्याय प्रक्रिया में बच्चों  की ओर विशेष ध्यान दिया गया है |  अदालत ने अभी हाल ही में एक ऐसे व्यक्ति को रिहा करने के आदेश दिए, जो ह्त्या का अपराध करते समय कानूनन नाबालिग था | कोर्ट  ने उसे दोषी ठहराया था|  44 साल बाद सुप्रीम कोर्ट  ने  उसकी रिहाई के आदेश दे दिए | भारत में न्यायालय सिर्फ दोषियों को को सजा देने के लिए नहीं बने हैं, बल्कि बालकों के मानव अधिकारों की रक्षा का भी उत्तरदायित्व उनके ऊपर है |  सुप्रीम कोर्ट ने इसी उत्तरदायित्व के निर्वहन में इस मामले के बालअपचारी की रिहाई का रास्ता प्रशस्त  किया |   मुकदद्मे की पृष्ठभूमि  Image by  Mohamed Hassan  from  Pixabay यह मामला हंस राज बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मुकदद्मे से सम्बंधित है | उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में वर्ष 1981 में ए...

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