Top 5 Human Rights Articles प्रत्येक भारतीय नागरिक को पढ़ने चाहिए (2026 गाइड)
गूगल डिजिटल तकनीकी क्षेत्र में विश्व का एक दिग्गज माना जाता है | Ahrefs blog के अनुसार जुलाई २०२४ में विश्व में गूगल पर सर्वाधिक खोजे जाने वाली चीजों में यूट्यूब, एमाज़ॉन, फेसबुक, वोर्डले, जीमेल, के बाद गूगल का स्थान रहा है | यूट्यूब भी गूगल की ही एक उपकंपनी है |
कार्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी एक व्यवसायिक मॉडल है जिसके तहत कम्पनियां अपने व्यवसाय के दौरान सामजिक चिंताओं का ध्यान रखतीं है जिसके तहत अपनी आय का कुछ हिस्सा अपने हितधारकों और सामाजिक दायित्वों पर खर्च करती है | इस सामाजिक जिम्मेदरी के तहत गूगल भी दायित्वाधीन है | शायद इसी के तहत गूगल ने अपने कार्यक्रमों में मानव अधिकार नीतियों को समाहित किया है |
यह भी पढ़ें :भारत में ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट को डॉक्टर (Dr.) का दर्जा — एक मानवाधिकार संदर्भ
विश्वभर में गूगल डिजिटल रूप में ज्ञान और सूचनाओं को उपलब्ध कराने वाला एक अत्यधिक व्यापक प्लेटफॉर्म है | ज्ञान और सूचनाओं का सीधा सम्बन्ध मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के अलावा उनके उल्लंघन से भी है | सही और पुष्ट सूचनाएं व्यक्तियों,समूहों और समाज के मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण में अत्यधिक सहायक होती हैं जबकि असत्य और अपुष्ट सूचनाएं मानवाधिकारों के उल्लंघन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं |
ऐसी स्थति में विश्वभर में मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण की दिशा में सर्वश्रेष्ट्र रणनीति पर काम करने की आवश्यका को गूगल के संचालकों ने महसूस किया, जिसके परिणामस्वरुप विश्वभर में व्यक्तियों के मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए के लिए एक मानव अधिकार निति का निर्माण किया गया|
यह भी पढ़ें : Fake Rape Case in India: सच्चाई जो कम लोग जानते हैं (BNS 2023) | Law vs Reality
गूगल की मानव अधिकार निति के कारण आज अनेकों लोगों के मानवाधिकारों का ससंरक्षण हो पा रहा है यद्धपि ऐसा नहीं है कि डिजिटल तकनीकी के दिग्गज के रूप में पहचान रखने वाले गूगल ने डिजिटल तकनीकी के उपयोग द्वारा हो रहीं सभी तरह के मानवाधिकार की घटनाओं को रोकने में सफल रहा हो | हाँ ,यह अवश्य है कि उसके लिए गूगल के प्रयासों की सराहना करनी होगी |
डिजिटल तकनीकी के क्षेत्र में करीब-करीब सम्पूर्ण विश्व को अपने उत्पादों और सेवाओं से पोषित करने वाली दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनी को कौन नहीं जानता है ? भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में तो इसे गूगल बाबा के नाम से जाना जाता है | ग्रामीणों के समक्ष जानकारी सम्बन्धी किसी समस्या के सामने आने पर तपाक से वे कहते है कि मोबाइल पर "गूगल बाबा" को खोलो अभी सब पता लग जाएगा |
यह भी पढ़ें : भारत में Human Rights और Law: महत्वपूर्ण लेखों की सूची (2024-2026)
कम्पनी की स्थापना के समय से ही कंपनी का एक पवित्र एवम मौलिक विचार रहा है कि आधुनिक तकनीकी का सदुपयोग करते हुए ऐसी सेवाएं और उत्पाद विकसित किये जाए जो मानव के जीवन को सरल, सुगम और आरामदायक बनाते हों | कंपनी का यही विचार आज तक उसके तथा उसके हितधारकों लिए मूलमंत्र बना हुया है |
सयुक्त राष्ट्रसंघ की सामान्य सभा द्वारा वर्ष, १९४८ मेंयूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ़ ह्यूमन राइट्स को संस्वीकृत किया गया जिसके बाद सम्पूर्ण विश्व में विभिन्न देशों की सरकारों के लिए मानव अधिकारों के रूप में कुछ मौलिक सिद्धांत तय किये गए |
यह भी पढ़ें : Failed Romantic Relationship: क्या संबंध टूटने पर बनता है बलात्कार का केस? BNS 2023
इन सिद्धांतों का उपयोग वहां की सरकारें अपने यहाँ नीति निर्धारण के लिए स्वेच्छा से कर सकती थी | इन मानव अधिकार सिद्धांतों का किसी भी देश की सरकारों द्वारा अपने यहाँ नीति निर्धारण के लिए आवश्यक रूप से से पालन किये जाने की कोई बाध्यता नहीं थी | लेकिन ये सिद्धांत लोगों की गरिमा और उनके चहुमुखी विकास के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण थे |
१९४८ के बाद मानव अधिकारों के विकास के अनुक्रम में सयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मानव अधिकार प्रसंविदायों /संधियों को संस्वीकृति प्रदान की गई | जिसके तहत मानव अधिकार सिद्धांतों को एक प्रकार से कानूनी मान्यता प्रदान की गयी तथा सदस्य देशों के लिए प्रसंविदायों में वर्णित सिद्धांतों को अपने अपने देश की नीतियों में शामिल कर उनका क्रियान्वयन कुछ आवश्यक आरक्षण के साथ आवश्यक बना दिया गया |
यह भी पढ़ें : Transgender Bill 2026: क्या Self-Identity का अधिकार खतरे में है?
मानव अधिकारों के विकास के इस अनुक्रम में मानव अधिकारों का सम्मान ,संरक्षण और पूर्ती के दायित्व के अधीन न सिर्फ सरकार के अभिन्न अंग के रूप में कार्य करने वाली संस्थाए आयी बल्कि प्राइवेट कंपनियों को भी इसमें शामिल होना पड़ा | सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा अलग -अलग मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए अलग -अलग मानव अधिकार घोषणाओं ,प्रसंविदायों को समय -समय पर आवश्यकतानुसार संस्वीकृत प्रदान की गयी |
इसी अनुक्रम में अनेक बहु राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा आये दिन किये जाने वाले मानव अधिकारों के उल्लंघन को दृष्टिगत रकते हुए कुछ विशेष सिद्धांतों का संकलन किया गया जिससे कंपनियों द्वारा किये जाने वाले मानव अधिकारों को रोका जा सके |
यह भी पढ़ें :TB-मुक्त भारत 2025: स्वास्थ्य मिशन या मानवाधिकार परीक्षा?
इस समस्या के समाधान के लिए व्यापार और मानव अधिकारों पर सयुक्त राष्ट्र मार्गदर्शक सिद्धांतों (यूएनजीपी) को वैश्विक स्वीकृति सयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा प्रदान की गयी |
गूगल की स्थापना के समय संस्थापकों के विचारों ने गूगल के निदेशको को मानव अधिकार निति निर्माण के लिए प्रेरित किया | यदि गूगल की मानव अधिकार निति पर नजर डाली जाय तो स्पष्ट होता है कि जब वह अपनी निति के तहत नया उत्पाद या सेवायें लाती है या वैश्विक स्तर पर अपनी व्यवसायिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का विस्तार करती है तो कंपनी की व्यवसायिक गतिविधियां और कार्यक्रम अंतराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानव अधिकार सिद्धांत और मानदंडों द्वारा दिशा-निर्देश प्राप्त करते है अर्थात कंपनी व्यवसाय में मानव अधिकारों का अनुसरण करती है |
गूगल कंपनी अपनी नीतियों में मानव अधिकार की सार्वभौमिक घोषणा तथा अन्य मानव अधिकार प्रसंविदायों में निहित मानव अधिकार के मानदंडों का सम्मान करने के प्रति प्रतिबद्ध रहती है | इसके अतिरिक्त विशेष तौर पर गूगल कंपनी अपनी नीतियों में व्यापार और मानव अधिकारों पर सयुक्त राष्ट्र मार्गदर्शक सिद्धांतों (यूएनजीपी) और वैश्विक नेटवर्क पहल सिद्धांत (जीएनआई सिद्धांतों) का अनुसरण और अनुपालन करने के प्रति भी प्रतिबद्ध रहती है|
यह भी पढ़ें :AI से वकालत करना पड़ा महंगा ! बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठोका ₹50,000 का जुर्माना !गूगल कंपनी का प्रबन्ध तंत्र आधुनिक तकनीकी का मानवीय कल्याण में सकारात्मक उपयोग और उसकी क्षमताओं को भलीभांति पहचानता है तथा यह भी भलीभांति जानता है कि मानव अधिकारों का उल्लंघन किये बिना भी व्यवसायिक कार्यक्रमों ,गतिविधियों और नए उत्त्पादों की श्रंखला को कैसे जारी रखा जा सकता है ?
कंपनी मानव अधिकारों का सम्मान, संरक्षण और पूर्ति का पालन करते हुए विश्व भर के लोगों के लिए असंख्य नए अवसर उत्पन्न कर मानवता को नया आयाम प्रदान कर रही है | यद्यपि ऐसा नहीं है कि आधुनिक उन्नत तकनीकी मानव अधिकारों के उल्लंघन में सहायक नहीं है |
यह भी पढ़ें :प्रेम के नाम पर पॉक्सो से मुक्ति: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
विशेष रूप से डिजिटल तकनीकी की उन्नति ने अपराधियों के लिये भी अपराध के लिए नए नए प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा दिए हैं | इसलिए आजकल बहुत तेजी के साथ समाज में साइबर अपराधों की बाढ़ आ गयी है | आज अपराधी हर प्रकार के अपराथ में डिजिटल तकनीकी का सहारा ले रहा है |
लेकिन तकनीकी के विकसित संस्करण के कारण वह पकड़ में भी आ रहा है| लेकिन प्रश्न यह महत्वपूर्ण नहीं है कि अपराधी भी उसी तकनीकी के कारण पकड़ में आ रहा है बल्कि महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि डिजिटिल तकनीकी प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले अपराधों को रोका कैसे जाय ? कंपनी के हितधारकों,उत्पादों और सेवा प्राप्त करने वालों, के मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण को बल कैसे प्रदान किया जाए ?
यह भी पढ़ें :Forensic Science और मानव अधिकार: अपराध जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की 5 महत्वपूर्ण भूमिकाएँ
गूगल कंपनी ने अपनी मानव अधिकार निति के तहत दरअसल उक्त समस्या का समाधान किया है जिसके तहत कंपनी के हितधारकों, उत्पादों और सेवा प्राप्त करने वालों,के मानव अधिकारों का हनन होने से पहले ही रोक दिया जाए | जिसके लिए कंपनी ने अनेक प्रयास किये है और अनवरत नित नए नीतिगत नवोन्वेषण प्रयोग जारी है |
मानव अधिकारों को सम्मान और संररक्षण की दिशा में गूगल बहुत गंभीर प्रतीत होता है | अपनी नीतियों के अधीन गूगल अपने यहां मानव अधिकारों पर कार्यक्रम आयोजित और संचालित करता रहता है | यह कार्यक्रम उसकी उसकी केंद्रीय गतिविधि के रूप में मान्यता प्राप्त है |
यह भी पढ़ें :Passive Euthanasia in India: क्या Article 21 के तहत Right to Die with Dignity मान्य है?
ये कार्यक्रम गूगल के सभी उत्पादों और सेवाओं में मानव अधिकारों के सम्मान के प्रति कठोर प्रतिबद्ध्ता प्रस्तुत करते है | गूगल इसके अतिरिक्त उक्त कर्यक्रमों और गतिविधियों के जरिये व्यापार और मानव अधिकारों पर सयुक्त राष्ट्र मार्गदर्शक सिद्धांतों (यूएनजीपी) और वैश्विक नेटवर्क पहल सिद्धांतों को (जीएनआई सिद्धांतों) के प्रति भी सम्मान भाव जागृत करता है |
यही नहीं मानव अधिकारों के प्रति गूगल की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गूगल के उत्पादों और कार्यक्रमों में मानव अधिकार कार्य सम्बन्धी क्रियाकलापों की देख रेख हेतु वरिष्ठ प्रबंधन को लगाया गया है | जो गूगल के अल्फाबेट के निदेशक मंडल की लेखा परिक्षा और अनुपालन समिति को नियमित रूप से मानव अधिकार सम्बन्धी नई रिपोर्ट से अवगत कराते रहते हैं |
यह भी पढ़ें : Delhi Excise Policy Case: Discharge Order और Article 21 का मानवाधिकार विश्लेषण
उपरोक्त से स्पष्ट होता है कि गूगल अपनी मानव अधिकार नीति के तहत वैश्विक मानव अधिकारों का सम्मान करता है तथा उसके उलंघन को रोकने के लिए अनवरत प्रयास एवम नवोन्वेषण करता रहता है |
यही नहीं,वर्ष २०२० में गूगल कंपनी के बोर्ड ने मानव अधिकार सम्बंधित मुद्दों की निगरानी के लिए कंपनी के महत्वपूर्ण कार्यों के रूप में शामिल करने के लिए लेखा परीक्षा और अनुपालन समिति के चार्टर में संसोधन कराया | कंपनी का यह कार्य मानव अधिकारों को सिद्धांतों से निकालकर व्यवहारिक अमलीजामा पहनाने के समान है जो कि मानव अधिकारों के प्रति सम्मान के लिए कंपनी की साफसुथरी नीयत का खुलासा करता है |
कंपनी की नीतियों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि वह मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं के कार्यान्वयन को समय के साथ -साथ आगे बढ़ाते रहते है और अनवरत उनका विकास करते रहते हैं | जैसे कि गूगल ने मानव अधिकार कार्यक्रम की निगरानी और मार्गदर्शन करने के लिए एक मानव अधिकार कार्यकारी परिषद् की स्थापना की | गूगल का वरिष्ठ प्रबंधन अपनी दीर्घकालीन रणनीतियों और दिन-प्रतिदिन के निर्णय लेने में मानव अधिकार सिद्धांतों और मानदंडों द्वारा अनुसरित होते हैं |
यह भी पढ़ें : Live-in-Relationship छुपाकर शादी करना धोखा,2026? कोर्ट ने रद्द किया विवाह – जानिए पूरा कानून
विश्व में किसी भी व्यवस्था के सुचारू सञ्चालन के लिए पारस्परिक सहयोग या सहभागिता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है | गूगल भी अपनी कंपनी की निति निर्माण में सहभागिता पर अत्यधिक जोर देता है | जिसके तहत वह मानव अधिकारों के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए लिए बाहरी विशेषज्ञों,नागरिक समाज और हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करता है| जिससे गूगल के नए उत्पादों,सेवाओं और नीतियों को नयी दिशा मिलती है |
यह पारस्परिक सहयोग और सहभागिता कंपनी को मानव अधिकार सम्बन्धी बर्तमान तथा भविष्य के प्रभावों तथा संभावित खतरों की पहचान कराने में मदद करती है, परिणामस्वरूप, समय रहते मुद्दों को प्राथमिकता देने और उनका समुचित समाधान निकालने की प्रक्रिया आसान हो जाती है | सहभागिता रुपी यह मूलमंत्र गूगल को अपने कार्यक्रम,नीतियों ,प्रथाओं और सेवाओं में अनवरत सुधार लाने का सुअवसर भी प्रदान करती है |
यह भी पढ़ें :भारत में फर्जी विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई 2026: शिक्षा का अधिकार, मानवाधिकार और कानूनी सच्चाई
गूगल की मानव अधिकार निति के अवलोकन से स्पष्ट मत बनता है कि गूगल कंपनी कुछ भी करती है, जिसमे नए उत्पादों के उदघाटन से लेकर दुनिया भर में अपने कार्यक्रमों और गतिविधयों के संचालन का विस्तार करना शामिल है, उन सभी में वह अंतराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानवाधिकार मानदंड के दायत्वाधीन होती है अर्थात निष्कर्ष के रूप में कहा जाय तो गूगल भी मानव अधिकारों का सम्मान करता है |
आज यह लेख मेरे जीवन संघर्ष में सदैव कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले साथी के नाम समर्पित है | आप सभी से आशा है कि लेख आपको पसंद आया होगा तथा टिपणी और मुख्य पृष्ठ पर फॉलोवर का बटन दबा कर समर्थन करना न भूलें जिससे भविष्य में आपको आपकी पसंद के लेख समय पर मिलते रहें |
यह भी पढ़ें :भारत में ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट को डॉक्टर (Dr.) का दर्जा — एक मानवाधिकार संदर्भ
उत्तर :कंपनियों के लिए सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन अनिवार्य नहीं किया गया है यह पूर्ण रूप से स्वेछिक है |
उत्तर :गूगल की नीतियों और अभ्यासों में अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार सम्बन्धी प्रतिबद्धताओं को समाहित किया गया है | कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी(सीएसआर) के तहत भी गूगल मानव अधिकारों के प्रति दायित्वाधीन है |
उत्तर :गूगल ने अपने उत्पादों और सेवाओं को मानव अधिकार सिद्धांतों के अनुकूल बनाये रखने के लिए हाउ सर्च वर्क्स, हाउ प्ले वर्क्स और हाउ यूट्यूब वर्क्स आदि जैसे उपकरणों का उद्द्घाटन किया है | गूगल द्वारा वर्ष २०१८ में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के सिद्धांत का भी उदघाटन किया जिसके तहत वे किसी ऐसे आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस उपकरण को डिज़ायन या उपयोग में नहीं लाएंगे जिससे किसी के मानव अधिकारों का उलंघन होता हो |
अस्वीकरण
यह लेख केवल शैक्षणिक और विधिक जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- Human Rights Guru / Law Vs Reality
Latest Human Rights Analysis trusted by global legal, academic & policy readers
जैसा कि आपने बताया कि यूट्यूब भी गुगल की उपकंपनी है और यूट्यूब पर हजारों वीडियो प्रतिदिन अपलोड हो रहे है जो हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाते है।
जवाब देंहटाएं