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राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान 2026: भारत में मानव अधिकार चुनौतियाँ

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  Cradit:Advt. of U P Govt भूमिका  भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर बहुत अधिक है | हर दिन सैकड़ों परिवार अपने लोगों को खो देते हैं |  यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चिंता है | इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान 2026 की शुरूआत की, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके |  इसके अलावा इसका उद्देश्य आम नागरिकों में जिम्मेदार यातायात व्यवहार को विकसित करना है, यह व्यवहार ही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने का सर्वश्रेष्ट्र उपाय है |  सरकार द्वारा चलाया जाने वाला यह अभियान आम जनता तक सिर्फ यातायात नियमों की जानकारी प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षित सड़को और सुरक्षित यात्रा से जुड़ा मानव अधिकार है, जो प्रत्यक्ष रूप संविधान प्रद्दत जीवन के अधिकार के अधीन आता है | यह राज्य की जिम्मेदारी है। यह भी पढ़ें  : प्रेम के नाम पर पॉक्सो से मुक्ति: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सड़क दुर्घटनाओं का वैश्विक भार  विश्व भर में हर साल रोड ट्रैफिक दुर्घटनाओं की वजह से लगभग 11.9 ल...

बच्चे, मानव अधिकार और संविधान: भारत अपने भविष्य के साथ क्या कर रहा है?

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संविधान किसी भी देश के नागरिकों के मानव अधिकारों के संवर्धन एवम संरक्षण और उनका उलंघन रोकने के लिए महत्वपूर्ण  दस्तावेज होता है तथा जो समाज के सभी वर्गों के अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है | भारतीय संविधान में विशेषकर बच्चों के अधिकारों को विशेष महत्त्व दिया है | जिसके आधार पर उनकी मासूमियत और भविष्य की रक्षा होती है | मानवाधिकार और संवैधानिक प्रावधान दोनों बालकों को सुरक्षित, शसक्त और विकासोन्मुख वातावरण प्रदान करते हैं |  यह लेख अद्यतन किया गया है |  बच्चे देश का मुस्तकबिल होते हैं तथा देश के विकास और सम्बृद्धि के आधार होते हैं | भारत में एक लिखित संविधान है जो नागरिकों को,जिसमे अपनी मासूमियत के लिए पहचाने जाने वाले बच्चे भी शामिल हैं, के संवैधानिक और विधिक अधिकारों की गारंटी प्रदान करता है | इसी लिए भारतीय संविधान बाल अधिकारों का प्रणेता हैं | बच्चों के अधिकार को  मूल अधिकार और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के रूप में संविधान में समाहित किया गया हैं | बच्चे मानवता की दिव्यतम निधि हैं, जो देश के विकास की बुनियाद और गारंटी दोनों है |  संयुक्त राष्ट्र ...

निःशुल्क विधिक सहायता और मानव अधिकार : भारत से वैश्विक मानकों तक

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Cradit: Chat GPT प्रस्तावना विधिक सहायता का सम्पूर्ण ढांचा मानव अधिकार,नैसर्गिक न्याय और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों की बुनियाद पर खड़ा है |  कानूनी प्रक्रिया के चुंगल में फँसे प्रत्येक व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए तथा कोई भी व्यक्ति अनसुना नहीं रहना चाहिए, इसी सिद्धांत का पोषण विधिक सहायता और निःशुल्क विधिक सहायता करते हैं |  भारतीय संविधान के तहत सभी के लिए न्याय सुनिश्चित करते हुए गरीबों और कमजोरों के लिए निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था की गयी है इसके साथ ही राज्य को उत्तरदायी बनाया गया है कि वह सबके लिए समान अवसर उपलब्ध कराएं | इसी अनुक्रम में विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम ,1987 पास किया गया |  निःशुल्क विधिक सहायता क्या है ?  विधिक सहायता और निःशुल्क विधिक सहायता से तात्पर्य  ऐसी सहयता से है जिसकी आवश्यकता वाद दाखिल करने वाले या अभियुक्त  को न्यायलय के समक्ष अपना पक्ष रकने के लिए पड़ती है लेकिन आर्थिक तंगी के चलते या किसी अन्य कारण से अपना पक्ष न्यायलय के समक्ष रखने में असमर्थ होता है, ऐसी स्तिथि में सरकार द्...

विधि का उल्लंघन करने वाले बालकों के मानव अधिकार: एक अवलोकन

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भारत में   पुलिस द्वारा अपनी चालानी रिपोर्ट में अक्सर विधि का  उल्लंघन  करने वाले बालकों की  अधिक उम्र दर्शाने के कारण उन्हें प्रौढ़ जेलों में बंद कर दिया जाता है जिसके कारण उन्हें अपने मानव अधिकारों से वंचित होना पड़ता है | जबकि बालकों के  लिए विशेष रूप से  बने किशोर न्याय (बालको की देखरेख और संरक्षक)अधिनियम ,२०१५ में बालकों के मानव अधिकारों के संवर्धन एवम संरक्षण के लिए कई विधिक सिद्धांतों की व्यवस्था की गयी है | लेकिन उन सिद्धांतों का किशोर न्याय बोर्ड ,बाल कल्याण समिति तथा अन्य अभिकरणों द्वारा समुचित रूप से अनुपालन  और अनुसरण नहीं हो रहा है | जिसके कारण आये दिन विधि का उलंघन करने वाले बालकों के मानव अधिकारों का उल्लंघन आम बात हो गयी है | समाज और आपराधिक न्याय व्यवस्था के विभिन्न अंगों द्वारा उक्त सिद्धांतों का व्यवहार  में अनुसरण करके विधि का उलंघन करने वाले बालकों के जाने-अनजाने में होने वाले मानव अधिकार उल्लंघन को आसानी से रोका जा सकता है | मुख्य शब्द :  मानव अधिकार , किशोर , विधि का  उल्लंघन  करने वाले बालक, भारतीय संविधान...

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