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UGC Fake Universities List 2026: भारत के फर्जी विश्वविद्यालयों की पूरी सूची

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Cradit: ChatGPT  Fake Universities UGC list 2026  दिल्ली 1 .आल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड फिजिकल हेल्थ साइंस (ए. आई. पी.पी. एच.एस.) स्टेट गवर्नमेंट यूनीवर्सिटी , आफस के एच नं. 608-609, प्रथम तल संन्त कृपाल सिंह पब्लिक ट्रस्ट बिल्डिंग बी.डी.ओ. कायार्लय के पास अलीपुर दिल्ली -36 कमर्सिअल यूनिवर्सिटी लिमिटेड दरियागंज ,दिल्ली 2 .यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी दिल्ली 3 .वोकेशनल यूनिवर्सिटी दिल्ली 4 .ए.डी.आर.- सेंट्रिक जुरिडिकल यूनिवर्सिटी, ए.डी.आर. हाउस, 8जे, गोपाल टॉवर, 25 राजेन्द्र प्लेस, नई दिल्ली – 110008 5 .इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड इंजीनियरिंग ,नई दिल्ली 6  .विश्वकुमार ओप्पन यूनिवर्सिटी फॉर सेल्फ एम्प्लॉयमेंट, इंडिया सेवा सदन, 672, 7  .संजय एंक्लेव, अपोिजट जी.टी .के .डिपो, नई दिल्ली – 110033 8  .आध्याित्मक विश्वविद्यालय (स्पिरिचुअल यूनिवर्सिटी), 351-352, फे स-1, ब्लॉक-ए, विजय बिहार रिठाला ,रोहिणी दिल्ली – 110085 9  .वल्डर् पीस ऑफ़ यूनाइटेड नेशनस यूनिवर्सिटी (डब्लू.पी.यू.एन.यू), नंबर-201, द्वतीय तल,बेस्ट बिजनेश पाकर्, नेताजी सुभाष प्लेस, पीतमपुरा, नई...

जनरेटिव एआई और मानवाधिकार: चैटजीपीटी के बढ़ते प्रभाव का विश्लेषण

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Image by  Markus Winkler  from  Pixabay प्रस्तावना  आजकल जनरेटिव आर्टिफिशल इंटेलिजेंस(AI) तकनीक, विशेषकर चैटजीपीटी जैसे औजारों का मानवीय जीवन में महत्व बहुत बढ़ गया है |  यह तकनीकी मनुष्य के जीवन, कार्य और उसके संवाद तथा भाषा को बदल  रही  हैं | समय के साथ इस तकनीकी में जितना बदलाव आ रहा है, उसी तरह मानव अधिकारों पर इसके प्रभाव को लेकर चिंताएँ भी तेजी से बढ़ रहीं हैं |   प्रश्न उठ रहा है कि क्या चैट जीपीटी जैसी अत्याधुनिक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकी मनुष्य के लिए केवल मददगार है ? या मनुष्य  की  गोपनीयता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और रोज़गार जैसे मौलिक अधिकारों  के लिए खतरे की एक घंटी है ? इस लेख में हैं हम समझने का प्रयास करेंगे कि जनरेटिव एआई कैसे मानव अधिकारों को प्रभावित कर सकता है ? भविष्य में मानव अधिकार उलंघन रोकने के लिए हम क्या -क्या कदम उठा सकते हैं ?  इसके अतिरिक्त भविष्य में  कैसे जनरेटिव एआई का भी मानव हित में भरपूर उपयोग कर सकें ?  जनरेटिवे एआई क्या है ?   Image by  Riekus ...

Adolescence ड्रामा: कैसे सोशल मीडिया और विषाक्त मर्दानगी मानव अधिकारों के लिए खतरा बन रहे हैं ?

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  Source:Netflix's Promotional Photo   प्रस्तावना  कल्पना कीजिये ---एक 13 वर्षीय किशोर, अपने स्कूल की एक सहपाठी छात्रा की ह्त्या के आरोप में फँस जाता है |  उसका न कोई आपराधिक इतिहास है, न वह हिंसा से प्रेरित है और न वह आपराधिक मंसा रखता है |  फिर अचानक यह जघन्य अपराध की कहानी घटित क्यों होती है ? इसके पीछे है उसका हर दिन फ़ोन की स्क्रीन पर स्क्रॉल करना, Manosphere जैसी परम्परागत सोच से प्रभावित होना |  जिसे आज के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और हवा देकर आग में घी डालने का काम कर रहे हैं |   सयुंक्त राष्ट्र महिला वेबसाइट के अनुसार ऑनलाइन स्त्री-द्वेष स्कूलों, कार्यस्थलों और अंतरंग संबंधों में भी अपनी जगह बना रहा है। विश्व भर में  5.5 अरब से ज़्यादा लोग ऑनलाइन हैं – और 5.2 अरब से ज़्यादा लोग सोशल मीडिया पर भी  हैं  –  Image by  Oleksandr Pidvalnyi  from  Pixabay डिजिटल स्पेस आम आदमी के लिए सीखने और डिजिटल संपर्क का केंद्र बिंदु बन गया है।  एक ओर इंटरनेट के फायदे हैं, वहीं दूसरी ओर इसका उपयोग पारस्परिक नफ़रत, गाली-...

भारत में ड्रोन कानून 2025: नियम व वैश्विक असर

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Source:Chat GPT-5 परिचय   बात उन दिनों की है जब ड्रोन खिलोनो के रूप में कभी-कभार दिखाई देते थे | हमारे घर के सामने एक कामर्सिअल पायलट रहते थे | हमारे घर के सामने एक बड़ा पार्क है |    एक दिन पायलट एक ड्रोन लाए और उसे  पार्क में उड़ाया | उस समय लोगो में उत्सुकता बहुत थी | पायलट द्वारा उड़ाया गया ड्रॉन बहुत तेज आवाज कर रहा था जो आजकल के ड्रोन्स नहीं करते हैं| ड्रोन की आवाज सुनकर उत्सुकतावस सभी घर से बाहर आये कि अचानक पार्क में से इतनी आवाज कैसे आ रही है | उस समय लेखक का पुत्र  6 -7 वर्ष का रहा होगा तथा वह भी ड्रोन की आवाज सुनकर बाहर दौड़ा तो पाया कि एक अजीब सी आकृति पार्क के आसमान में उड़ रही है |  उसे देख कर सभी लोग आशचर्य चकित थे | बाद में पार्क में गए तो पायलट महोदय से बात-चीत में पता चला कि वह कुछ और नहीं बल्कि ड्रोन था |  उस ड्रोन को उड़ता देकने के बाद लेखक के पुत्र ने जिद पकड़ ली कि मुझे ड्रोन चाहिए तो चाहिए | लेखक उसकी जिद के सामने वेबस था |  ड्रोन के सम्बन्ध में धुंदली सी याद है कभी -कभी खबरे आती थी कि आगरा स्थित ताज महल के आसपास संदिग्ध ड्रोन...

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