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राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान 2026: भारत में मानव अधिकार चुनौतियाँ

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  Cradit:Advt. of U P Govt भूमिका  भारत विश्व के उन देशों में शामिल है जहाँ सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर बहुत अधिक है | हर दिन सैकड़ों परिवार अपने लोगों को खो देते हैं |  यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक चिंता है | इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा अभियान 2026 की शुरूआत की, ताकि सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सके |  इसके अलावा इसका उद्देश्य आम नागरिकों में जिम्मेदार यातायात व्यवहार को विकसित करना है, यह व्यवहार ही सड़क दुर्घटनाओं को रोकने का सर्वश्रेष्ट्र उपाय है |  सरकार द्वारा चलाया जाने वाला यह अभियान आम जनता तक सिर्फ यातायात नियमों की जानकारी प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षित सड़को और सुरक्षित यात्रा से जुड़ा मानव अधिकार है, जो प्रत्यक्ष रूप संविधान प्रद्दत जीवन के अधिकार के अधीन आता है | यह राज्य की जिम्मेदारी है। यह भी पढ़ें  : प्रेम के नाम पर पॉक्सो से मुक्ति: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सड़क दुर्घटनाओं का वैश्विक भार  विश्व भर में हर साल रोड ट्रैफिक दुर्घटनाओं की वजह से लगभग 11.9 ल...

राज्यों की नई नीतियाँ – डॉग लवर्स की जीत या आम इंसान की?

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प्रस्तावना अद्धतन : जनवरी  2026  भारत में विगत कुछ वर्षों से आवारा कुत्तों का मुद्दा तेजी से उभरा है तथा वर्तमान में सम्पूर्ण देश में बहस का केंद्र बिंदु बना हुया है। एक तरफ़ इंसान की सुरक्षा को लेकर बेवसी और रोज़ बढ़ते आवारा कुत्तों के हमले हैं, वहीं दूसरी तरफ़ डॉग लवर्स और एनजीओ का तर्क है कि कुत्तों को भी जीने का अधिकार है तथा वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली -एनसीआर की सड़कों से आवारा कुत्तों  को उठाकर उन्हें शेल्टर होम्स भेजने तथा उन्हें दुबारा न छोड़े जाने का आदेश दिया था |  कोर्ट ने पूर्व में दिए गए आदेश को संशोधित किया, जिसके अनुसार शेल्टर होम में ले जाए गए आवारा कुतो को उनकी नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी स्थान पर छोड़ने के आदेश दिए गए, जहाँ से आवारा कुत्ते उठाये गए हैं |  पूर्व में दिया गया आदेश दिल्ली-एनसीआर तक सीमित था जिसे बढ़ा कर सम्पूर्ण देश में विस्तारित कर दिया गया | यह फैसला सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर लागू होगा | सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई राज्यों ने इस मुद्दे पर नई नीतियाँ बनानी शुरू कर दी हैं। ...

भारत मे आवारा कुत्तों का संकट 2026 : कानून , सुरक्षा और समाधान

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Cradit:Dr Raj Kumar भूमिका  भारत की सड़कें करीब 60 मिलियन आवारा कुत्तों का घर हैं |आवारा कुत्तों की लगातार नसबंदी की पुख्ता व्यवस्था न होने के कारण इनकी जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है | सरकारी आंकड़ों के अनुसार विगत कुछ वर्षों से आवारा कुत्तों के इंसानो पर हमले की घटनाओं में भी तेजी से बृद्धि दर्ज की गई है |  भारत में आवारा कुत्तों के हमले जन स्वास्थ्य समस्या में तब्दील हो रहे है | कुत्ते के काटने से रेबीज के कारण हुई 6 वर्षीय बच्ची की मृत्यु पर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कौशिकी शाहा द्वारा लिखित एक लेख प्रकाशित हुआ| जिसका माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा  जनहित याचिका (PIL) के रूप में  स्वतः संज्ञान लिया गया |   जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 11 अगस्त 2025 के आदेश ने आवारा कुत्तों के संकट को फिर सुर्ख़ियों में ला दिया है| जिससे स्पष्ट है कि भारत में मानवअधिकार / सुरक्षा बनाम पशु अधिकारों पर बहस तेज हो गई है | एक ओर पशु प्रेमी हैं तथा दूसरी ओर आवारा कुत्तों के हमलो से त्रस्त और परेशान आम जनता है |कुत्तों के हमलों से खौफजदा आमजन पर पशु प्रेमी हावी हैं | पशु प्रेमियों के तर...

काटते कुत्तों से कराहते लोग: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला और NCR की सच्चाई!

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प्रस्तावना  भारत आवारा कुत्तों की एक गंभीर समस्या से जूझ रहा है | आज देश भर में सड़कों और गलियों में आम आदमी को चोर उच्चक्कों और बदमासो से इतना डर नहीं है जितना डर आवारा कुत्तों के हमलों का है | आये दिन अखबारों और न्यूज़ चैनलों में खबरे आती है - बच्चो पर आवारा कुत्तों का हमला , कुत्तों ने सुबह की सैर करते बुजुर्ग को नौचा , कुत्तो के काटने से अस्पताल में भर्ती , अस्पातल में रैबीज के टीके की किल्लत | आवारा कुत्तों के हमलों का भारत पर दबाब सरकारी आकड़ों के अनुसार भारत में डॉग बाईट ( कुत्ता काटने ) की घटनाएं साल दर साल   बड रही हैं |   वर्ष 2022  में   डॉग बाईट की 21,89,909  घटनाएं हुई | वर्ष 2023 में ये घटनाएं बढ़कर 30,52,521 हो गई   तथा वर्ष 2024 में इन घटनाओं में अप्रत्याशित बृद्धि हुई और 37,15,713  घटनाओं तक पहुच गई | सिर्फ जनवरी 2025 के आकड़े   4,29,664 घटनाओं तक पहुंच गए | ये आकड़े सरकारी है यद्यपि वास्तविकता मे...

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