Top 5 Human Rights Articles प्रत्येक भारतीय नागरिक को पढ़ने चाहिए (2026 गाइड)
विश्व भर में अनेक देश आज भी आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहे हैं | जिनमे भारत भी एक देश है | भारत में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 6 करोड़ से अधिक है |
विगत कुछ वर्षों में आवारा कुत्तों की जनसंख्या में बृद्धि के साथ -साथ उनके हमलों की घटनाओं में भी अत्यधिक बृद्धि दर्ज की गई है |
भारतीय संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में आवारा कुत्तों के काटने की 37 लाख से अधिक घटनाएं दर्ज की गई |
इसके अलावा अनेक घटनाएं ऐसी है जो रिपोर्ट ही नहीं होती है यदि उनको भी मिला लिया जाए तो यह आँकड़ा और ऊपर पहुंच जाता है |
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ऐसी गंभीर स्थति में कुछ पीड़ित स्वयं न्यायालय पहुंचे तथा कुछ मामलों में जनहित याचिकाएं डाली गई लेकिन अभी हाल ही में दिल्ली में घटित घटना के बाद भारत की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने स्वप्रेरणा से संज्ञान लिया और उसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया |
इस घटना में दिल्ली में एक 6 वर्षीय बालिका को कुत्ते ने काट लिया था और उसकी रेबीज होने से मृत्यु हो गई थी| इस घटना को टाइम्स ऑफ़ इंडिया ,अंग्रेजी दैनिक ने रिपोर्ट किया था | इसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया था |
यही नहीं विगत वर्षों में ऐसी अनेक घटनाओं की खबरे अखबारों और मीडिया के माध्यम से आम आदमी और सरकार के सामने आई है | इसी लिए आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की मांग लगातार उठती रही है |
भारत की राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए आंदोलन करने वाले व्यक्ति के रूप में मुख्य चेहरा भारतीय जनता पार्टी के जाने माने नेता विजय गोयल का रहा है | विजय गोयल द्वारा सरकार से पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 में संशोधन की भी मांग की गई है |
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद आवारा कुत्तों के संकट को समाप्त करने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाये हैं | जिनमे से एक रेबीज फ्री सिटी के लक्ष्य को रखा जाना भी है |
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आवारा कुत्तों से मुक्त होने का नीदरलैंड का सफर बड़ा दिलचस्प और कानूनी कठोरता और लचीलेपन से सराबोर रहा है |
बहुत कम देश हैं जिन्होंने आवारा कुत्तों की समस्या से निजात पाई है | उनमे से एक है नीदरलैंड |
यह दुनिया का ऐसा देश है, जिसने अपने अथक प्रयासों से देश को स्ट्रीट डॉग फ्री कंट्री/आवारा कुत्तों से मुक्त देश बना लिया है|
यह कोई छोटी उपलब्धी नहीं है | नीदरलैंड में पशु संरक्षण एक चुनावी मुद्दा भी रहता आया है |आप सोचेंगे कि नीदरलैंड ने ये कमाल कैसे किया ?
तो सबसे पहले दिमाग में विचार आएगा कि क्या उन्होंने सभी कुत्तों को मरवा दिया या फिर विचार आएगा कि वास्तव में कोई मानवीय और कानूनी रास्ता अपनाया है ? आइये जानते है इस रहस्य्मयी हकीकत को विस्तार से |
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ऐतिहासिक रूप में 19 वीं सदी में आवारा कुत्तों की समस्या बहुत गंभीर थी | लोग कुत्ते पालने के शौकीन थे | लोग गरीबी के चलते अक्सर कुत्तों की देखभाल न करपाने की स्तिथि में उन्हें आवारा छोड़ देते थे |
धीरे -धीरे यह स्तिथि आम आदमी के स्वास्थय और सुरक्षा के लिए संकट बन कर उभरी | ऐसी स्तिथि में संकट का समाधान आवश्यक था | जिस पर नीदरलैंड सरकार ने अनवरत काम किया है |
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2006 में, नीदरलैंड की राष्ट्रीय संसद में एक पशु अधिकारों की वकालत करने वाली एक पार्टी चुनी गई। यह करने वाला नीदरलैंड दुनिया का पहला देश बना |
जिसकी 'पार्टी फॉर द एनिमल्स' ने डच संसद के निचले सदन (लोअर हाउस) में प्रवेश कर यह सुनिश्चित किया कि पशु कल्याण को भी राजनीतिक एजेंडे में शामिल किया जाए।
आवारा कुत्तों के संकट के समाधान के लिए नीदरलैंड की सरकार ने एक विशेष रणनीति तथा लक्ष्य को दृष्टिगत यह तय किया कि संकट का समाधान सिर्फ आवारा कुत्तों को “मार देना” नहीं है, बल्कि स्थायी और मानवीय समाधान की तलाश करनी होगी।
वहाँ की सरकार द्वारा इसी रणनीति के साथ कानून निर्मित किये गए और साथ -साथ आमजन को भी जागरूक करने की रणनीति बनायी गई | सरकार द्वारा पूर्ण राजनैतिक इच्छा शक्ति के साथ इन रणनीतिओं और लक्ष्य पर काम किया और सफलता पाई |
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देश भर में आवारा कुत्तों की समस्या से मुक्ति पाने के लिए नीदरलैंड सरकार द्वारा कानून बनाये गए तथा उनका सख्ती से पालन किया गया |
इन कानूनों में एक कानून पशु कल्याण कानून था | इस क़ानून के तहत पालतू जानवर को आवारा छोड़ना कानूनन गंभीर अपराध था | इसके साथ ही पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के लिए कठोर सजा तथा जुर्माने का भी प्रावधान किया गया |
नीदरलैंड ने आवारा कुत्तों की जनसँख्या नियंत्रण नीति के तहत CNVR नामक कार्यक्रम चलाया | इस कायक्रम के चार चरण थे |
पहला चरण आवारा जानवरों को पकड़ना | दूसरा चरण उसकी नसबंदी(स्टरलाइजेसशन) करना | तीसरा चरण टीकाकरण था तथा चौथा चरण उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद छोड़ देना था |
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आवारा कुत्तों की जनसँख्या को नियंत्रित करना तथा नए बच्चों की सड़कों पर पैदावार को रोकना | इसके अलावा सभी पालतू कुत्तों का आवश्यक पंजीकरण और टीकाकरण अनिवार्य किया गया था |
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नीदरलैंड सरकार द्वारा अपने कानूनी और नीतिगत प्रावधानों में आवारा कुत्तों की आज्ञापक स्टरलाइज़ेशन (नसबन्दी) और वेक्सीनेशन (टीकाकरण ) का प्रावधान किया गया | जिसे विश्व भर में कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण का सर्वाधिक प्रभावी तरीका माना गया है |
विश्व स्वास्थ्य संघटन के अनुसार भी कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के लिए करीब 70 प्रतिशत कुत्तों का स्टरलाइज़ेशन (नसबन्दी) जरूरी है |
इस प्रकार यदि देखा जाए तो नीदरलैंड सरकार ने कुत्तों की प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण के लिए विश्व स्वास्थय संगठन से भी उच्च स्तर के मानक को अपने यहाँ लागू किया |
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नीदरलैंड सरकार द्वारा डॉग ब्रीडर्स के यहाँ से कुत्तों की खरीदारी को हतोत्साहित किया गया तथा आवारा कुत्तों को गोद लेने की व्यवस्था के प्रोत्साहन पर अधिक जोर दिया गया |
इसके अतिरिक्त डॉग्स शेल्टर्स होम्स से आवारा कुत्तों को गोद लेने वालों को कानूनी सुरक्षा के अलावा अन्य सुविधाएं देने का भी प्रावधान किया गया था |
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नीदरलैंड में पशु स्वास्थय और कल्याण अधिनियम ,1992 को पशु अधिनियम 2011 द्वारा बदल दिया गया | नीदरलैंड में पशुओं के साथ क्रूरता एक दंडनीय अपराध है।
'क्रूरता' का अर्थ है जानवरों के साथ मारपीट करना या उनकी देखभाल में लापरवाही बरतना, जैसे कि उनकी ज़रूरतों की अनदेखी करना या उन्हें समय पर खाना न देना आदि।
पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता की शिकायत नीदरलैंड्स खाद्य और उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा प्राधिकरण (NVWA) या पुलिस को की जा सकती है |
ये संस्थाएं पशुओं के साथ होने वाले अपराधों की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए उत्तरदायित्व निभाती हैं |
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नीदरलैंड में पशु अधिकारों के बारे में राष्ट्रीय अभियान के तहत समाज और स्कूल -कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम चलाये गए | कुत्ता प्रेमियों को एक जिम्मेदार पशु स्वामी बनने के लिए उत्साहित किया गया |
जिम्मेदार पशु स्वामी का तात्पर्य है कि वह अपने कुत्ते का सभी तरह से ध्यान रखे ,समय से उनका टीकाकरण कराये तथा उन्हें किसी भी सूरत में सड़कों पर आवारा न छोड़े |
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इन सभी कानूनी प्रावधानों के कठोर अनुपालन तथा सामाजिक सहयोग से नीदरलेंड की सड़के आवारा कुत्तों से मुक्त हो गई है |
नीदरलैंड दुनिया के अग्रणी ऐसे देशों में गिना जाता है जहाँ आवारा कुत्तों की संख्या नगण्य के बराबर हो गई है |
नीदरलैंड अपने यहां की सड़कों को आवारा कुत्तों से मुक्त कराने में सफल रहा है और वह ऐसा करने वाला विश्व का अग्रणी देश बन गया है |
ऐसी स्थति में आवारा कुत्तों से सड़कों को मुक्त कराने वाले मॉडल को सफल मॉडल कहने और स्वीकार करने में किसी को कोई जुरेज नहीं होना चाहिए |
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भारत को नीदरलैंड से कोई विशेष चीज सीखने की अवश्यकता नहीं है, अलावा इसके कि भारत में आवारा कुत्तों की समस्या से छुटकारा पाने के लिए उपलब्ध कानूनों और नीतियों में मामूली सुधार किया जाए |
भारत के मुकाबले नीदरलैंड में क़ानून और नीतियों का अनुपालन कठोरता और प्रबल राजनैतिक इच्छा शक्ति के साथ किया गया है | बस एकमात्र यही सीख भारत ले सकता है और किसी सीख की आवश्यकता नहीं है |
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भारत में आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने की जिम्मेदारी के लिए स्थानीय कानूनों में पहले से ही प्रावधान किये गए हैं | इसके अतिरिक्त पशु क्रूरता निवारण अधिनियम ,1960 पहले से ही उपलब्ध है | यह क़ानून पशुओं के प्रति क्रूरता को प्रतिषेधित करता है |
इस अधिनियम के तहत बने पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम 2023, जो आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने, मानव और कुत्तों के बीच संघर्ष को कम करने के लिए बनाए गए हैं |
इन नियमों के तहत आवारा कुत्तों को पकड़ा जाता है, उनका टीकाकरण और नसबंदी की जाती है, और फिर उन्हें वापस उनके ही इलाके में छोड़ दिया जाता है| इन 2023 के नियमो ने 2001 के नियमों की जगह ले ली हैं |
यदि आवारा कुत्तों के संकट के सन्दर्भ में भारत के क़ानून और नीतियों की तुलना करें तो कुछ विशेष अंतर नहीं दिखाई देता है |
लेकिन यह जरूर मानना पडेगा कि नीदरलैंड के क़ानून में उलंघन की स्थति में जुर्माना और सजा का प्रावधान कुछ कठोर अवश्य रहा है | इसके अतिरिक्त सबसे बड़ा अंतर क़ानून और नीतियों के निर्वहन का रहा है |
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नीदरलैंड के मॉडल से स्पष्ट है कि अगर कानून, सरकार और जनता मिलकर काम करें, तो किसी भी देश से आवारा कुत्तों का संकट खत्म किया जा सकता है।
यदि भारत इस मॉडल का आवश्यकता अनुसार आंशिक रूप से अनुसरण करे तो यह देश के लिए यह एक प्रेरणा श्रोत हो सकता है तथा जिसके द्वारा इंसान और आवारा कुत्ते दोनों की सुरक्षा और सह-अस्तित्व को सुनिश्चित किया जा सकता है।
अगर भारत ने भी इस मॉडल के अनुसरण में सख्त कानून, जागरूकता और जिम्मेदार पालतू पशु स्वामित्व को अपनाया तथा अनुपालन किया, तो आने वाले वर्षों में हम भी घोषित कर पाएंगे – “आवारा कुत्तों से मुक्त भारत।”
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प्रश्न : क्या नीदरलैंड में सच में कोई भी आवारा कुत्ता नहीं है?
उत्तर : हाँ, नीदरलैंड पहला ऐसा देश बन गया है जहाँ अब एक भी आवारा कुत्ता सड़कों पर नहीं है। यह सब सरकार की मजबूत नीतियों, पशु अधिकार कानूनों और जागरूक समाज की वजह से संभव हो पाया है।
प्रश्न : नीदरलैंड ने आवारा कुत्तों की समस्या को कैसे हल किया?
उत्तर : नीदरलैंड ने कुत्तों का अनिवार्य पंजीकरण, नसबंदी अभियान, जान चेतना अभियान ,भारी दंड वाले पशु सुरक्षा कानून, और कुत्तों को गोद लेने को बढ़ावा देकर यह लक्ष्य प्राप्त किया।
प्रश्न : क्या भारत भी नीदरलैंड की तरह आवारा कुत्तों से मुक्त देश बन सकता है?
उत्तर : हाँ, यदि भारत सरकार उपलब्ध कानूनों में आवश्य्क संसोधन करे, उन्हें मजबूत बनाए, नसबंदी प्रोग्राम्स को अत्यधिक प्रभावी रूप से लागू करे और लोगों के बीच जनचेतना अभिया चलाये जिससे लोग जागरूक हों तो भारत भी आवारा कुत्तों से मुक्त देश बन सकता है।
प्रश्न : नीदरलैंड में कुत्तों के लिए क्या-क्या कानून हैं?
उत्तर : नीदरलैंड में सभी पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, जानवरों के प्रति क्रूरता पर सख्त सज़ा है, और गोद लेने की प्रक्रिया को आसान और प्रोत्साहित किया गया है।
प्रश्न : क्या नीदरलैंड ने आवारा कुत्तों को मार दिया?
उत्तर : नहीं, नीदरलैंड ने Dog Kill-Free Policy अपनाई| सभी कुत्तों को शेल्टर्स में ले जाकर उनकी देखभाल की गई और उन्हें गोद दिलवाया गया।
प्रश्न : भारत में इतने सारे स्ट्रीट डॉग्स क्यों हैं ?
उत्तर :भारत में स्ट्रीट डॉग्स के संकट से निपटने के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान और नीतिया पहले से ही उपलब्ध हैं, लेकिन उनके प्रभावी अनुपालन में लापरवाही भारत में विश्व के सर्वाधिक स्ट्रीट डॉग्स के लिए जिम्मेदार है |
अस्वीकरण
यह लेख केवल शैक्षणिक और विधिक जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- Human Rights Guru / Law Vs Reality
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जिससे भी सीखने को मिले खुले दिल और दिमाग से सीखना चाहिए
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