Top 5 Human Rights Articles प्रत्येक भारतीय नागरिक को पढ़ने चाहिए (2026 गाइड)
भारत
आवारा
कुत्तों की
एक
गंभीर
समस्या
से
जूझ
रहा
है
| आज
देश
भर
में
सड़कों
और
गलियों
में
आम
आदमी
को
चोर
उच्चक्कों और
बदमासो
से
इतना
डर
नहीं
है
जितना
डर
आवारा
कुत्तों के
हमलों
का
है
| आये
दिन
अखबारों और
न्यूज़
चैनलों
में
खबरे
आती
है
-बच्चो
पर
आवारा
कुत्तों का
हमला,
कुत्तों ने
सुबह
की
सैर
करते
बुजुर्ग को
नौचा,
कुत्तो
के
काटने
से
अस्पताल में
भर्ती,
अस्पातल में
रैबीज
के
टीके
की
किल्लत
|
यह भी पढ़ें : मोदी युग में मानव अधिकार: बदलते भारत की नई सोच
सरकारी आकड़ों के अनुसार भारत में डॉग बाईट (कुत्ता काटने) की घटनाएं साल दर साल बड रही हैं | वर्ष 2022 में डॉग बाईट की 21,89,909 घटनाएं हुई | वर्ष 2023 में ये घटनाएं बढ़कर 30,52,521 हो गई तथा वर्ष 2024 में इन घटनाओं में अप्रत्याशित बृद्धि हुई और 37,15,713 घटनाओं तक पहुच गई | सिर्फ जनवरी 2025 के आकड़े 4,29,664 घटनाओं तक पहुंच गए | ये आकड़े सरकारी है यद्यपि वास्तविकता में ये आकड़े और भी अधिक हो सकते हैं | यानी हर साल लाखों लोग आवारा कुत्तों के काटने से पीड़ित हो रहे है और खौफजदा हैं |
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आवारा
कुत्तो
के
हमलों
को
लेकर
लम्बे
समय
से
देश
के
विभिन्न हाई
कोर्ट्स और
सुप्रीम कोर्ट
में
कानूनी
लड़ाई
चल
रही
है
| न्याय
भूमि
बनाम
गवर्नमेंट ऑफ़
एन
सी
टी
ऑफ़
दिल्ली
एंड
अदर्स
के
मामले
में
दिल्ली
हाई
कोर्ट
ने
स्थापित किया
कि,
"दिव्यांगजनों को
आवारा
पशुओं
के
हमले
के
खतरे
के
बिना
चलने
का
मौलिक
अधिकार
है।" भारत में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने वाला एक कानून बना, जिसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के रूप मे जाना जाता है |
माननीय
सुप्रीम कोर्ट
ने
टाइम्स
ऑफ
इंडिया
में
छपी
एक
खबर
“सिटी
हाउंडेड बाय
स्ट्रेज, किड्स
पे
प्राइस”
के
आधार
पर
मामले
का
स्वतः
संज्ञान लिया
था
।
इस
खबर
में
रैबीज
से
छह
साल
की
बच्ची
की
मौत
के
बारे
में
बताया
गया
था|
कोर्ट
ने
11 अगस्त
2025 को
आदेश
दिया
कि
किसी
भी
परिस्थिति में
सड़कों
से
पकडे
गए
आवारा
कुत्तों को
उनके
स्थानांतरण के
बाद
फिर
से
सड़कों
पर
नहीं
छोड़ा
जाना
चाहिए।
इस
संबंध
में,
संबंधित अधिकारियों द्वारा
नियमित
रूप
से
उचित
रिकॉर्ड रखा
जाना
चाहिए।आवारा कुत्तों को
पशु
जन्म
नियंत्रण नियम,
2023 के
अनुसार
पकड़ा
जाएगा,
उनकी
नसबंदी
की
जाएगी
और
उनका
टीकाकरण किया
जाएगा | जैसा
कि
ऊपर
उल्लेख
किया
गया
है,उन्हें वापस नहीं
छोड़ा
जाएगा।
कुत्ता
आश्रयों/पाउंडों में
आवारा
कुत्तों की
नसबंदी
और
उनका
टीकाकरण करने
के
लिए
और
हिरासत
में
लिए
जाने
वाले
आवारा
कुत्तों की
देखभाल
के
लिए
पर्याप्त कर्मचारी होने
चाहिए।
दिल्ली
सरकार
की
ओर
से
पेश
हुए
सॉलिसिटर जनरल
तुषार
मेहता
ने
बताया
कि
साल
2024 में
भारत
में
37 लाख
से
ज्यादा
कुत्ता
काटने
के
मामले
दर्ज
हुए।
उन्होंने दलील
दी
कि
सिर्फ
नसबंदी
से
हमलों
को
रोका
नहीं
जा
सकता
और
बच्चों,
बुजुर्गों और
कमजोर
वर्गों
की
सुरक्षा के
लिए
तुरंत
कदम
उठाना
जरूरी
है।
सभी
पक्षों
को
सुनने
के
बाद
जस्टिस
विक्रम
नाथ,
जस्टिस
संदीप
मेहता
और
जस्टिस
एन.वी. अंजरिया की
तीन
जजों
की
पीठ
ने
22 अगस्त
2025 को
संशोधित दिशानिर्देश जारी
किए, जो इस प्रकार
हैं:
1.आवारा कुत्तों को
पकड़
कर
नगर
निगम
और
प्राधिकरण द्वारा
नसबंदी
और
टीकाकरण किया
जाय।
2.रेबीज से संक्रमित या आक्रामक कुत्तों को छोड़ कर अन्य सभी आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद वापस उनके इलाकों में छोड़ा जाए|
3.हर
वार्ड
में
फीडिंग
जोन
बनाए
जाएं,
और
सड़कों
पर
खाना
खिलाना
प्रतिबंधित होगा।
4.कोर्ट के
आदेश
के
पालन
में
बाधा
डालने
वाले
व्यक्ति या
संगठन
पर
कार्रवाई होगी।
5.जो नागरिक आवारा कुत्तों को गोद लेने के इच्छुक हैं वे नागरिक नगर निगम से संपर्क कर विधिवत प्रक्रिया के तहत कुत्ते को गोद ले सकते हैं, लेकिन उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि वह कुत्ता दोबारा सड़क पर न आए।
6.कोर्ट के आदेश में यह मामला अब सिर्फ दिल्ली एनसीआर का नहीं रहा बल्कि इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत के लिए कर दिया गया है | अब सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को ABC नियम, 2023 का पालन करना होगा |
कोर्ट
के
इस
फैसले
ने
एनिमल
लवर्स
को
निश्चित रूप
से
खुश
होने
का
अवसर
दिया
है,
लेकिन
काटते
कुत्तों से
कराहते
लोगों
को
शायद
वह
राहत
नहीं
मिली
है
जिसकी
उन्हें
उम्मीद
थी
| ज़मीनी
स्तर
पर
कुत्तों के
हमले
से
आमजन
को
राहत
कैसे
मिलेगी
यह
तो
आने
वाला
समय
ही
बताएगा
|
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बच्चे
खेल
के
मैदान
में
जाने
से
डरते
हैं।
माता-पिता बच्चों को
अकेले
स्कूल
भेजने
से
कतराते
हैं।
बुज़ुर्ग सुबह-सुबह वॉक पर
निकलने
से
डरते
हैं।
दिहाड़ी मज़दूर
और
ग़रीब
तबका
सबसे
ज्यादा
पीड़ित
है,
क्योंकि उनके
पास
कुत्तों के
हमलों
से
बचने
के
लिए
आवागमन
के
लिए
चार
पहिया
वाहन
नहीं
हैं,
महंगे
रेबीज
इंजेक्शन या
सुरक्षित गेट बन्द कॉलोनी
का
विकल्प
ही
नहीं
है।
सवाल
यह
है
– जब
इंसान
ही
सुरक्षित नहीं
रहेगा
तो
“मानव
अधिकार”
किस
काम
के?
दैनिक
भास्कर
में
छपी
एक
रिपोर्ट के
अनुसार
एक
कुत्ते
ने मात्र २
घंटे
में
करीब
25 मासूम
बच्चों
पर
हमले
किये
| भारत
के
अन्य
शहरों
से
भी
खबरे
है
जिनमे
मासूम
बच्चों
को
कुत्तों के
झुण्ड
ने
बुरी
तरह
से
नौचा
और
बाद
में
उनकी
मृत्यु
हो
गई
| सोशल मीडिया
पर
तैरते
इन
घटनाओं
के
वीडियो
अत्यधिक ह्रदय
बिदारक
है|
जिन्हे
एक
सामान्य आदमी
देख
भी
नहीं
सकता
है
|
यद्यिप
सरकार
के
आकड़े
के
अनुसार
कुत्ते
के
काटने
से
होने
वाली
रैबीज
की
बीमारी
से
मौतों
का
आकड़ा
एक
सैकड़ा
से
भी
नीचे
है
लेकिन
काटने
के
मामले
लाखों
में
होने
से
इनके
इलाज
से
गरीब
आम
आदमी
की
कमर
टूट
रही
है|
जबकि
अधिकाँश गरीब
इसके
इलाज
के
लिए
सरकारी
अस्पताल पर
ही
निर्भर
रहते
है
| जहाँ
कभी उन्हें
विभिन्न वजहों
से
एंटी
रैबीज
टीके
नसीब
नहीं
हो
पाते
और
उन्हें
अनावश्य्क और
अकाल
मृत्यु
को
गले
लगाना
पड़ता
है
|
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आगरा में एक बच्ची को कुत्ते ने काट लिया | उसका पिता उसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर ले गया| जब उसने स्वास्थ्य कर्मियों को बच्ची को टीका लगवाने के लिए कहा तो उन्होंने बच्ची का आधार कार्ड मांगा जो उस समय पर उसके पास नहीं था | दुबारा उसके कभी एंटी रेबीज का टीका नहीं लग पाया | आखिरकार कुछ समय बाद उस मासूम बच्ची की तड़प -तड़प कर मृत्यु हो गई | उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अधिकारियों से घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी |यह मामला है वर्ष 2019 का तथा इस सम्बन्ध में 28 अगस्त के "द टाइम्स ऑफ़ इंडिया" के दिल्ली/आगरा अंक में खबर छपी |
आवारा कुत्तों के हमले में बदनसीब बाप ने अपनी मासूम बच्ची को खो दिया| उसकी मदद के लिए न सरकार आई न कुत्तों के लिए आँसू बहाने वाले एनिमल लवर्स और न गैर सरकारी संगठन | मासूम बच्ची को बचपन में ही खोने की अथाह पीड़ा उसका परिवार ही समझ सकता है अन्य कोई नहीं |
बच्ची के पिता ने आगरा के मानव अधिकार न्यायालय में मुआवजे के लिए एक याचिका डाली थी | वह याचिका भी मूल क्षेत्राधिकार के अभाव में खारिज हो गई |
उसे
किसी
प्रकार
का
न्याय
मिला
क्या
? शायद
नहीं
? उसकी
गरीबी
के
चलते
वह
अपना
केस
उच्च
न्यायालय या
सर्वोच्च न्यायालय तक
ले
जाने
में
असमर्थ
रहा
| गरीबी
हमेशा
मानव
अधिकारों का
अतिक्रमण करती
है
|
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इस पूरे मुद्दे पर समाज स्पष्ट रूप से दो हिस्सों में बंट गया है,एक तरफ एनिमल लवर्स की दलीलें है और दूसी और आवारा कुत्तों के हमलों से पीड़ित लोग, भयभीत या कराहते लोगों की दलीलें | डॉग लवर्स कहते हैं – “कुत्तों को उनके मूल निवास स्थान से हटाना अमानवीय है। उन्हें भी जीने का अधिकार हासिल हैं।” पीड़ित कहते हैं – “इंसान की जान सबसे ऊपर है।"
इस बात को टी एम इरशद बनाम केरला राज्य, 2024 में केरला उच्च न्यायालय ने भी स्थापित किया है कि, "आवारा कुत्ते हमारे समाज में एक ख़तरा पैदा कर रहे हैं। स्कूली बच्चे अकेले स्कूल जाने से डरते हैं क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं आवारा कुत्ते उन पर हमला न कर दें। कई नागरिकों की सुबह की सैर पर जाना आदत बन गई है। आवारा कुत्तों के हमले की आशंका के कारण आजकल कुछ इलाकों में सुबह की सैर भी संभव नहीं है। अगर आवारा कुत्तों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है, तो कुत्ते प्रेमी उनके लिए लड़ेंगे। लेकिन हमारा मानना है कि इंसानों को आवारा कुत्तों से ज़्यादा तरजीह दी जानी चाहिए। बेशक, इंसानों द्वारा आवारा कुत्तों पर बर्बर हमले की भी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।"
हाँ,आम आदमी और गरीब की एक चिंता जरूर है कि अगर कुत्तों से हमारी जान जाएगी या उनके काटने से शारीरिक ,मानसिक और आर्थिक पीड़ा होगी, तो हमारे अधिकारों का क्या होगा?”
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भारत मे आवारा कुत्तो के हमलो की गम्भीर समस्या का समाधान निम्नवत संभव है |
1.तेज़ नसबंदी अभियान – वर्ल्ड आर्गेनाइजेशन ऑन एनिमल हेल्थ के अनुसरण में सरकार द्वारा आवारा कुत्तों के 70 % का तेजी के साथ टीकाकरण और नसबंदी का लक्ष्य ईमानदारी से प्राप्त किया जाना चाहिए |
2.डॉग शेल्टर होम्स का निर्मान – हर शहर में व्यवस्थित तौर पर डॉग शेल्टर्स /सेंटर बनाए जाएं।
3.रैबीज़ वैक्सीन की मुफ़्त् व्यवस्था– खासकर गरीब तबके के लिए वेक्सीन की व्यवस्था निशुल्क करने का प्रावधान हो |
4.जवाबदेही तय हो– नगर निगम और प्रशासन पर कुत्तों की नसबंदी और उनके वेक्सीनेशन के सम्बन्ध में उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए | लापरवाही की स्तिथि में जुर्माना लगाया जाना चाहिए |
5.सख्त कानून – इंसान की जान को खतरे में डालने वाले मामलों में सख्त दंड का प्रावधान
किया जाए | कुत्ते के काटने से घायल या मृत्यु की स्तिथि में तत्काल आर्थिक मुआवजे
का प्रावधान किया जाए |
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भारत में यह बहस सिर्फ कुत्तों के अधिकार बनाम इंसानों के अधिकार की नहीं है।असल सवाल यह है कि – क्या हम अपनी सड़कों और गलियों को बच्चों ,बुजुर्गों और आमजन के लिए सुरक्षित बना पाएंगे या नहीं? डॉग लवर्स की भावनाएं अपनी जगह सही हो सकती हैं, लेकिन इंसान का जीवन सबसे पहले आता है ,जिसका समर्थन माननीय केरला हाई कोर्ट ने भी अपने एक निर्णय में किया है | सुप्रीम कोर्ट ने दिशा तो दिखा दी है, लेकिन असली इंसाफ तभी मिलेगा जब कानून, सरकार और समाज मिलकर एक ठोस कदम उठाकर समस्या का सम्पूर्ण समाधान करने में सफल होंगे | क्योंकि सवाल अब भी वही है – “काटते कुत्तों से कराहते लोग आखिर कहाँ और कब पाएंगे इंसाफ?”
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प्रश्न :भारत में Stray Dogs इतने क्यों हैं?
उत्तर : भारत में Stray Dogs की संख्या ज़्यादा है क्योंकि नसबंदी (spaying/neutering) कम होती है, कूड़े-कचरे और समाज से उन्हें आसानी से खाना मिल जाता है।
प्रश्न : क्या Stray Dogs इंसानों के लिए खतरनाक हैं?
उत्तर : हाँ। भारत में हर वर्ष करीब 47 लाख लोग Dog Bites का शिकार होते हैं और इनमें से सैकड़ों मौतें Rabies Infection से होती हैं।
प्रश्न : क्या Stray Dogs को मारना कानूनन सही है?
उत्तर : नहीं। भारत में Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 और ABC Rules, 2023 के अनुसार Stray Dogs को मारना गैर-कानूनी है।
प्रश्न : अगर Stray Dog काट ले तो क्या करें?
उत्तर : काटने के घाव को तुरंत साबुन और पानी से धोएं, तत्काल डॉक्टर से संपर्क कर Anti-Rabies Vaccine (ARV) और Tetanus Injection लगवाएं |
प्रश्न : क्या Stray Dogs को खाना खिलाना गैर-कानूनी है?
उत्तर : नहीं। Supreme Court और High Court के फैसलों के अनुसार Stray Dogs को खाना खिलाना अपराध नहीं है। लेकिन नगर निगम या स्थानीय प्रशाशन द्वारा निर्धारित फीडिंग ज़ोन्स पर ही खाना खिलाने की अनुमति है |
प्रश्न : Stray Dogs की नसबंदी और Vaccination की जिम्मेदारी किसकी है?
उत्तर : नगर निगम (Municipal Corporations) की कानूनी जिम्मेदारी है | यह जिम्मेदारी उन्हें ABC (Animal Birth Control) Program,2023 के अनुसरण में निर्वहन करनी होती है |
प्रश्न : Rabies से सबसे ज़्यादा खतरा किससे है?
उत्तर :विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में हर साल लगभग 20,000 मौतें Rabies से होती हैं और इनमें से 95% केस Dog Bites से जुड़े होते हैं।
प्रश्न: Stray Dogs इंसानों पर हमला क्यों करते हैं?
उत्तर : ज़्यादातर कुत्ते भूख, डर या अपने बच्चों की रक्षा करने के कारण इंसानों पर हमला करते हैं।
प्रश्न :सुप्रीम कोर्ट का Stray Dogs पर हालिया फैसला क्या कहता है?
उत्तर : सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की सुरक्षा और कुत्तों के अधिकार दोनों में संतुलन करने का प्रयास किया | नगर निगम को नसबंदी और टीकाकरण तेज़ करने का आदेश दिया गया।नसबंदी और टीकाकरण के बाद आवारा कुत्तों को उसी स्थान पर छोड़ने के आदेश किये है जहाँ से उन्हें पकड़ा था |
प्रश्न : Stray Dogs की समस्या हो तो क्या करें?
उत्तर : स्थानीय नगर निगम को शिकायत करें| Stray Dogs को मारना गैर-कानूनी है।
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अस्वीकरण :
यह Blog केवल शैक्षणिक और विधिक जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
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लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- Human Rights Guru / Law Vs Reality
Latest Human Rights Analysis trusted by global legal, academic & policy readers
Very informative
जवाब देंहटाएंKnowledgeable.. Keep Sharing
जवाब देंहटाएंलेख तथ्यपूर्ण और उम्दा क्षेणी का है। डाटा का उपयोग भी बहुत ही सराहनीय है।
जवाब देंहटाएंआप एक अच्छे गोताखोर है। समसामयिक, तथ्य पूर्ण , ज्ञानवर्धक एवं सराहनीय लेख।
जवाब देंहटाएंVery well written and very informative too
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