Top 5 Human Rights Articles प्रत्येक भारतीय नागरिक को पढ़ने चाहिए (2026 गाइड)
अभी हाल ही में आवारा कुत्तों से सम्बंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने टिपणी की कि “कुत्ते इंसान के सबसे अच्छे दोस्त हैं उन्हें गरिमा के साथ जीने का हक है |” अर्थात जानवरों के जीवन के अधिकार को माननीय न्यायालय द्वारा स्वीकार किया गया है |
लेकिन हाल ही के वर्षों में आवारा कुत्तों के बच्चों,बुजुर्गों और आमजन पर हो रहे जान लेवा और भीभत्स हमलों ने सम्पूर्ण भारत में त्राहिम - त्राहिम मचा रखी है |
आमजन में अपने बच्चों और बुजुर्गों पर आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर चिंत्ता बढ़ी है | यही नहीं लोग आवारा कुत्तों से जुड़े मामले लेकर कोर्ट्स का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हुए है |
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दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार 19 जुलाई 2025 को राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कुत्ते की काटने की एक घटना में कुत्ते ने 2 घंटे में 45 लोगों पर हमला किया तथा उनके हाथ-पैर नोचे, इनमे 25 बच्चे भी शामिल थे |
सम्पूर्ण देश में हो रहीं इस तरह की घटनाओं ने इंसानी जान के प्रति खतरे को गंभीर कर दिया है इस कारण लोग इसे गंभीरता से ले रहे है | आज इंसान और जानवरों के बीच एक संघर्ष की स्तिथि पैदा हो गई है |
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माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में कुत्तों के काटने की घटनाओं से सम्बंधित 193 रिट याचिकाएं हुई |
जिनका निस्तारण मानीय न्यायालय ने एक साथ किया | यही नहीं देश के कई अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों में भी कुत्तों के काटे जाने की घटनाओं को लेकर मामले दायर किये गए हैं |
अभी हाल ही में देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली में कुत्तों द्वारा काटे जाने से रेबीज होने के कारण एक 6 वर्षीय बची की मृत्यु को लेकर एक अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी खबर का संज्ञान लेते हुए स्वप्रेरणा से एक जनहित याचिका को स्वीकार किया गया |
याचिका पर प्राथमिक सुनवाई सुनवाई के बाद मानीय सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि 8 हफ़्तों के अंदर दिल्ली सरकार को दिल्ली एनसीआर की सड़को से सभी आवारा कुत्तो को एनिमल शेल्टर्स में शिफ्ट करे |
कुत्तों के हमलों के खतरों से बचाव के सम्बन्ध में सर्वोच्च अदालत का यह एक ऐतिहासिक फैसला है | जो बच्चे कुत्तों के डर से स्कूल जाने से,पार्क में जाने से,बाजार जाने से डरते थे अब वे चैन की सांस ले सकेंगे | ये फैसला विशेष कर बच्चों और वुजुगों के लिए जीवनदायी सिद्ध होगा |
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कई बार न सिर्फ आवारा बल्कि अनेक जगह पालतू कुत्तों के हमले भी जानलेवा साबित हुए हैं | ऐसी स्तिथि में इंसानी हुकूक और कुत्तों के हुकूक के बीच प्राथमिकता का एक बड़ा प्रश्न खड़ा हो जाता है |
एक तरफ आमजन जो कुत्तों के हमलों से परेशान है, दुसरी तरफ कुत्ता प्रेमियों की फ़ौज जो हमेसा कुत्तों को जहाँ वह रहता है से दुसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का विरोध करते है ,के बीच असमंजस और संघर्ष की स्थति उत्पन्न हो गई है |
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क्या हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ इंसान की जान से ज्यादा कुत्तों की जान को प्राथमिकता दी जा रही है ? इंसानी जीवन को खतरों से बचाना उसका हक़ नहीं है ? कुत्तों के हमलों से इंसानी जीवन को होने वाले खतरे की जिम्मेदारी कौन लेगा ?
अन्ततोगत्वा ये जिम्मेदारी जागरूक समाज और राज्य को ही उठानी पड़ेगी | इंसान बनाम कुत्ते– प्राथमिकता किसे दी जानी चाहिए ?
पीड़ित हमेशा इंसान के पक्ष में होगा, लेकिन जानवर प्रेमी सदैव कुत्तों के पक्ष में खड़े दिखाई देते है | कुत्तों के हमलों में मासूम और इकलौतों बच्चों की मृत्यु पर भी पशु प्रेमियों की संवेदनाये बहुत ही कम द्रष्तिगोचर होती है |
भारत में सड़क पर घूमने वाले आवारा कुत्तों की संख्या लाखों में है। ऐसा नहीं है कि सभी कुत्ते आक्रामक या रेबीज के बाहक है लेकिन फिर भी समस्या गंभीर है तथा आमजन में आक्रोश है |
इनमें से अनेक कुत्ते कोई नुकसान नहीं करते। लेकिन…कई बार ये झुंड में हमला कर देते हैं | छोटे बच्चों पर, बुजुर्गों पर, अकेले जा रहे लोगों पर।
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भारतीय संसद में प्रस्तुत एक रिपोर्ट के मुताबिक़ हर साल करीब 37 लाख कुत्तों के काटने की घटनाये दर्ज हो रही हैं और कई मामलों में लोगों की जान भी जा रही है।
कुत्तों के हमलों और उससे होने वाली रेबीज की बीमारी से बच्चे, बूढ़े और जवानों की अकाल और अनावश्यक मृत्यु की ख़बरें लगातार सामने आ रही हैं |
लेकिन जब भी कोई आवाज़ उठाता है, जानवर प्रेमी विरोध के लिए सामने होते हैं | जानवरों के कोई हकूक नहीं है इसमे कोइ सचाई नाही है बल्कि सच्चाइ यह है कि जानवरों को कानूनी हकूक हासिल हैं |
कोई उनके खिलाफ नहीं है | कोई नहीं चाहता कि कुत्ते समाज का एक अंग न हो लेकिन ये जिम्मेदारी से हो | कोई जिम्मेदारी तो ले | जिम्मेदारी के लिए कोई सामने नहीं आता |
सब चाहते हैं – प्रशासन जिम्मेदारी ले। इस सम्बन्ध में स्थानीय निकाय कानूनों में आवारा जानवरों के प्रबंधन के प्रावधान किये गए है उनका अनुसरण होना चाहिए |
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ये झगड़ा इंसान और जानवरो के बीच का नहीं है, ये मुद्दा है सुरक्षा और संवेदनशीलता के बीच का।इंसानी सुरक्षा भी जरूरी है और जानवरों के प्रति संवेदनशीलता भी ज़रूरी हैं… लेकिन प्राथमिकता इंसानी जीवन को मिलनी ही चाहिए।यह कहना है केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन का |
उन्होंने यह भी कहा कि,"आवारा कुत्तों के हमले के डर से अनेक बच्चे अकेले स्कूल जाने से डरते हैं। अनेक लोग सुबह की सैर करने से डरते है |अगर आवारा कुत्तों के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है, तो कुत्ते प्रेमी उसके लिए लड़ने के लिए तैयार रहेंगे |"
भारत में न्यायालय का फैसला सर्वोपरि है | हम सब बतौर एक अच्छे नागरिक उसका पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है |
पशु प्रेमी भी अपनी जायज बात भारत के किसी भी न्यायालय में रखने के लिए स्वतंत्र है | ख़तरा मुक्त वातावरण संतुलित विकास के लिये आवश्यक है |
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प्रश्न : दिल्ली में आवारा कुत्तों से कैसे छुटकारा पाएं?
उत्तर :नई दिल्ली स्थित भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक स्वप्रेरित जनहित याचिका में फैसला सुनाया कि आठ हफ़्तों के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर स्थायी रूप से आश्रय गृहों में रखा जाए ।
प्रश्न : दिल्ली में आवारा कुत्तों के साथ क्या हो रहा है?
उत्तर: सर्वोच्च न्यायलय ने दिल्ली सरकार को आदेशित किया है कि दिल्ली एनसीआर की सड़कों से सभी आवारा कुत्तों को आश्रय गृहों में भेजा जाए |
प्रश्न : कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का क्या आदेश है?
उत्तर : कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिल्ली एनसीआर की सड़कों पर आवारा कुत्तों को पकड़ कर उन्हें आश्रय गृहों में स्थाई तौर पर भेजा जाए तथा इस कार्य में बाधा डालने वालों पर अदालत की अवमानना की कार्यवाही की चेतावनी भी दी है |
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अस्वीकरण :
यह Blog केवल शैक्षणिक और विधिक जन-जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है | यह किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं है | अधिक जानकारी के लिये योग्य अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है |
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लेखक
Dr Raj Kumar
Founder- Human Rights Guru / Law Vs Reality
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सटीक और सार्थक
जवाब देंहटाएंBest
जवाब देंहटाएंThanks for appreciation
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